गुजराती डिश लौकी/दूधी का थेपला:

ब्रेकफास्ट का समय हो या फिर लंच का,पराठे तो कभी भी खाए जा सकते हैं।
अगर आप या आपके परिवार में किसी को पराठे बेहद पसंद हैं तो उनके लिये आलू और मूली का नहीं बल्कि लौकी/दूधी का थेपला बनाएं।
लौकी/दूधी का थेपला एक गुजराती डिश है जो कि लोगों को बेहद पसंद आती है।

पिछले दिनों मेरी एक गुजराती सहेली की माता जी बैंकाक से आई हुई थी
और पौष्टिक और स्वादिष्ट खाने और लौकी से बनने वाले व्यंजनों पर जब बात चल रही थी तो वो बताने लगीं दूधी/ लौकी के थेपले के बारे में.

तो चलिए माताजी के बताए तरीके से बनाते हैं दूधी के थेपले….

सामग्री:

10 थेपले के लिए

गेंहू का आटा 1 कप
घिसी लौकी 1 कप
हरी मिर्च 1
कटा हरा धनिया 1 बड़ा चम्मच
कसूरी मेथी 1 बड़ा चम्मच
लाल मिर्च पाउडर ¼ छोटा चम्मच
हल्दी 2 चुटकी
चाट मसाला ¼ छोटा चम्मच
नमक छोटा ¾ चम्मच
तेल 1 छोटा चम्मच
सूखा आटा लगभग 2 बड़ा चम्मच, पराठा बेलने के लिए
तेल, पराठे सेकने के लिए

विधि:

हरी मिर्च का डंठल हटा कर और उसे अच्छे से धो कर महीन-महीन काट लें.
एक बर्तन में आटा, घिसी लौकी, कसूरी मेथी, हरी मिर्च, कटी हरी धनिया, नमक, लाल मिर्च पाउडर, हल्दी,चाट मसाला और तेल लीजिए
और सभी सामग्री को अच्छे से मिलते हुए आटा गूथिये.
लौकी के द्वारा छोड़े गये पानी से यह आटा बहुत आसानी से गुथ जाता है,
लेकिन अगर आपका आटा सूखा है तो आप ज़रा सा पानी मिला सकते हैं या फिर अगर आपकी लौकी ने अधिक पानी छोड़ा है
तो आप इसमें थोड़ा सा सूखा आटा भी मिला सकते हैं.
अब गुथे आटे को चिकना कर के इससे 10 लोइयाँ बनाइए.
अब तवा गरम करिए.
जब तक तवा गरम हो रहा है,
इस बीच एक लोई लीजिए और सूखे आटे की मदद से इस लोई को 4-5 इंच गोलाई में बेलिए.
अब तवे की सतह को ज़रा सा तेल/ घी लगाकर चिकना करिए और इसके ऊपर बिला थेपला रखिए.
तकरीबन 15-20 सेकेंड्स इंतजार करिए और थेपले को पलट दीजिए.
अब थोड़ा सा तेल/घी लगा कर थेपले को दोनों तरफ से मध्यम आँच पर सेक लीजिए.
इसी तरह से बाकी थेपले भी बनाए.
वैसे तो लौकी के थेपले ऐसे ही बहुत स्वादिष्ट लगते हैं लेकिन फिर भी अगर आप चाहें तो इन्हे किसी भी सब्जी के साथ परोसे जा सकते हैं.
वैसे लौकी के थेपले चाय के साथ भी बहुत अच्छे लगते है.

सुझाव:

लौकी के थेपले सफ़र पर ले जाने के लिए भी बहुत अच्छे रहते हैं.
जितनी देर में एक थेपला तवे पर पड़ा है,
आप दूसरा थेपला बेलकर तैयार कर लें.

इस से तवा खाली नही रहता है और समय की भी बचत होती है.
मसालों की मात्रा आप अपने स्वाद के अनुसार घटा बढ़ा सकते हैं.

By: Ashish Sarabhai

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