Ayodhya, Uttar Pradesh

दिगम्बर जैन मंदिर- यह मंदिर अवध के नवाब के कोषाध्यक्ष केसरी सिंह जी के द्वारा सन् 1781 में बनवाया गया था। त्रेतायुग कालीन इस मंदिर को बाद में चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के द्वारा पुनर्निर्मित किया गया था। दिगम्बर जैन सम्प्रदाय के पहले तीर्थंकर ऋषभ देव जो आदिनाथ के रूप में भी जाने जाते है की मूर्ति मंदिर के गर्भग्रह में स्थापित है। अयोध्या जैन मंदिरों के लिए भी खासा लोकप्रिय है। जैन धर्म के अनेक अनुयायी नियमित रूप से अयोध्या आते रहते हैं। अयोध्या को पांच जैन र्तीथकरों की जन्मभूमि भी कहा जाता है। जहां जिस र्तीथकर का जन्म हुआ था, वहीं उस र्तीथकर का मंदिर बना हुआ है।

Ayodhya is the place where 18 ‘Kalyanaks’ of different ‘tirthankars’ have taken place, including Adinath, Ajitnath, Abhinandannath, Sumatinath, Ananthnath. 31 feet tall Adinath idol was installed here recently. This is also the place where Ram (Padmakumar – Refer Padampuran) was born. This place has been recently developed with the blessings of Acharya ratna Deshbhushanji Maharaj and Ganini Pramukh Aryika Gyanmati Mataji.

How to reach:

By Bus:     Ayodhya Naya Ghat-2km.
By Train:   Ayodhya-1km., Cycle rickshaw, three-wheelers, etc. available round the clock at the station.
By Air:      Lucknow, 130 K.M.

Nearby Places:

Birth place of Bhagvan Dharm Nath, On Lacknow road – 28 K.M.
Shravasti – Bhagvan Sambhav Nath’s birth place, 110 K.M.

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