कैसे और कँहा खो जाती हैं हमारी सकारात्मक शक्तियाँ

    जब हम पूजा पाठ हवन यज्ञ मन्त्र तन्त्र यन्त्र आदि सब करवाते हैं तब भी कोई कार्य कुछ पल के लिये सफल होता हैं फिर परेशानी, दुविधा,उलझन,समस्या क्यों आती हैं ।ये कारण हैं की हमारी जीवन की सकारात्मक शक्तियाँ समाप्त हो चूकी हैं ,और जो हम पूजा पाठ करवा रहे हैं उससे कुछ क्षण का लाभ मिलता हैं ।

     जैसे किसी मनुष्य के शरीर की किसी बढ़ी बीमारी एक पल को सोचे एड्स जैसी बीमारी से प्रतिरोधक शक्ति खत्म हो जाती हैं, और उस पर कोई दवाई ,गोली या इंजेक्शन का असर नही होता हैं ,उसी प्रकार जब हमारी सकारात्मक शक्तियाँ समाप्त हो जाती हैं तो पूजा पाठ हवन आदि का कुछ ही समय असर रहता हैं । जैसे कोई गम्भीर बीमार को गोली या दवाई कुछ क्षण आराम देती हैं ।

       जैसा की मेने बताया था की जब हम ईश्वर की पूजा पाठ आराधना आदि करते हैं, किसी लाचार, कमजोर की मदद करते हैं, किसी असहाय को सहायता देते हैं, जो भी शुभ कर्म करते हैं तो हमे ईश्वर एक सकारात्मक शक्ति देता हैं । ये शक्तियाँ हर इंसान मे पायी जाती हैं । ईश्वर हर किसी को एक समान शक्ति देता हैं । जैसे हवा चलती हैं तो गरीब को कम हवा और अमीर को ज्यादा हवा नही मिलती ।

सूर्यदेव सबको रौशनी बराबर देता हैं।पर हम खुद कैसे कम करते हैं ये सकारात्मक शक्तियाँ कम और जीवन मे उलझन खड़ी करते हैं ।

     सबसे पहले एक गणित और समझे की आपके पास 100 प्रतिशत सकारात्मक शक्ति हैं, जो समय समय पर आपको बीमारी,धन समस्या,उलझन,तकलीफ,से बचाकर यश,सम्मान,वैभव,कीर्ति,सम्पत्ति,सम्पदा,स्वास्थ्य,आदि देती हैं ।अब हम इस मुद्दे पर आते हैं की हम इस 100 प्रतिशत शक्तियों को कँहा व्यर्थ गंवा देते हैं और ऋणात्मक हो जाते हैं ।

   आज हम इसका पहला भाग समझते हैं ।

     ईश्वर के बाद सबसे पहले पूजनीय होते हैं माता पिता और गुरुजन ।

     जब हम अपने माता पिता और गुरु का सम्मान नही करते ,उनको बार बार अपमानजनक शब्द कहते हैं, हमारी सकारात्मक शक्तियाँ खत्म हो जाती हैं ।

    आप ही सोचो की जब हम माँ बाप और जिसने हमे ज्ञान दिया उसके नही हो पाये तो भगवान के क्या हो जायेगे।

हम माँ पिता की सम्पत्ति को लेकर विवाद करते हैं ।हम ये सोचते हैं की हमे विरासत मे क्या मिलेगा,कभी ये नही सोचा की हम विरासत मे क्या छोड़ कर जायेगे ।

     माता पिता का ऋण आसानी से नही चुकाया जा सकता । जब भी हम कोई चुभती बात,या अपमानजनक शब्द माता पिता को कहते हैं हमारी सकारात्मक शक्ति का 50 प्रतिशत हिस्सा खत्म हो जाता हैं ।आजकल तो तकरीबन 75 प्रतिशत युवा माँ पिता को बेवकूफ ही समझने लगे हैं।

संस्कारो का सम्मान करना उन्हें बेवकूफी लगता हैं ।जब हम माँ पिता के दिल को चोंट पहुँचाते तो उनके मन के भीतर टीस निकलती हैं, वो नही बोलते पर मन की पीढ़ा हमारी शक्तियो का ह्रास करती हैं ।जितनी बार हम अपमान करते हैं उतनी बार हमे अपनी सकारात्मक शक्तियो से हटना पढ़ता हैं । अंत मे हम धनात्मक से ऋणात्मक हो जाते हैं । इसका परिणाम होता हैं ,हमारे बच्चे पर जो बढ़ा होकर हमारे ऊपर हावी होता हैं, या गलत रास्ते पर जाता हैं ,या बीमार ,मानसिक कमजोर आदि होता हैं ।

    इसी प्रकार जब गुरु का सम्मान या आदर नही करते,जब गुरु हमारे सामने आये उनका आशीर्वाद,नही लेते,उनके सामने बेठे रहते,तब हमारी 25 प्रतिशत शक्तियाँ समाप्त हो जाती हैं । आजकल नई पीढ़ी जो अंग्रेजी स्कूल मे पढ़ती हैं, उन्हें गुरु के चरण छुने की परम्परा से वंचित किया जा रहा हैं । ये भी एक गलत परम्परा हैं।

    अब एक ख़ास बात यदि हमने कोई बीज लगाया तो फल तो उसी समय नही आएगा । फल आने मे समय तो लगेगा, शायद फल आने के समय हम हो ना हो । पर वृक्ष तो फल देगा ही । इसी प्रकार यदि आप कहते हो की मै तो रोज माता पिता का सम्मान करता हूँ । उनको कुछ नही कहता फिर मुझे क्यों परेशानी आ रही ।ये परेशानी आज की नही हैं जी ये आपके पूर्व जन्म की हैं, जो आपने कांटे बोये थे । इसलिए आज भी सम्भल जाओ ।जो आप अपने बुजुर्गो को वृद्धा आश्रम मे छोड़ आये हो,या दर दर की ठोकरे खाने पर मजबूर कर रखे हो सम्भल जाओ । क्योकि माँ

पिता तो कुछ समय बाद चले जायेगे पर उनके आशीर्वाद और सकारात्मक शक्तियो से तुम जो वंचित रह जाओगे वो फिर पूजा पाठ हवन आदि से नही मिल पायेगी ।

    अब इसे ज्योतिष की भाषा मे समझाता हूँ । ज्योतिष मे सूर्य याने पिता और चन्द्रमा याने माता कहा गया हैं और गुरु याने गुरु ही हैं । जन्म के समय यदि ये तीनो मे से एक ग्रह भी खराब हो, कमजोर हो,नीच राशि मे हो तो अधिक उलझन आती हैं ।इन तीनो ग्रहो की जीवन मे ख़ास अहमियत हैं ।इनकी अहमियत पर हम बाद मै चर्चा करेगे ।अब ये क्यों खराब हुए ये ऊपर बता चुका हूँ ।अब यंहा और एक बात समझा रहा हूँ की आप जो माँ पिता को भोजन करवा रहे हो और कहते हो की मै ख्याल रखता हूँ तो कोई अहसान नही कर रहे हो । जिस दिन माँ बाप दिल से अपनों के सामने, समाज के सामने गर्व से कहेंगे की हमे गर्व हैं की ये हमारा बेटा हैं उस दिन से आपके जीवन मै सकारात्मक शक्तियो का अम्बार लग जायेगा ,और कुंडली के सारे अशुभ योग पल भर मे गायब।

आपकी प्रतिक्रिया या सवाल का सादर आमन्त्रण हैं ।

 

By: हंस जैन

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