1300 कि. मी. पद यात्रा कर कल पटना पधारेंगे जैन संत आचार्य विशुद्ध सागर महाराज , जैन श्रद्धालु करेंगे 25 साधुओं के विशाल ससंघ का भव्य स्वागत।

पटना सिटी। जैन जगत में आध्यात्म , ज्ञान , ध्यान , तप , त्याग , साधना और आगम चर्या के लिए सुविख्यात जैन संत शिरोमणि आचार्य प्रवर श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ का गुरुवार को प्राचीन पाटलिपुत्र की पुण्यधरा पटना नगर में भव्य मंगल प्रवेश होगा।

25 जैन संतों का जत्था सर्वप्रथम महामुनि श्री सेठ सुदर्शन स्वामी की पावन निर्वाण भूमि श्री कमलदह जी दिगम्बर जैन सिद्ध क्षेत्र गुलजारबाग में दर्शन ध्यान करेंगे। जहां गुरुवार का रात्रि विश्राम भी होगा। इसके बाद शुक्रवार प्रातः कांग्रेस मैदान स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर होते हुए नगर भ्रमण कर मीठापुर स्थित दिगम्बर जैन मंदिर पहुचेंगे जहां उनका आहार होगा। फिर आगे की तीर्थ यात्रा के लिए गया जी की ओर मंगल विहार करेंगे।

सकल दिगम्बर जैन समाज पटना ने आचार्य श्री ससंघ के भव्य अगवानी की तैयारी पूरी कर ली है। जैन साधुओं के विशाल ससंघ के इंतजार में स्थानीय जैन समाज पलक पावरें बिछाये बैठी है। उनके मंगल प्रवेश पर भव्य स्वागत करने को हर जैन श्रावक अतिउत्साहित है।

विशुद्ध सागर महाराज प्रथम बार पहुंचे है बिहार

आपको बता दें कि राष्ट्रसंत सूरिगच्छाचार्य गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी महामुनिराज के शिष्य वात्सल्य धनी आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज का बिहार राज्य में प्रथम बार पद विहार चल रहा है। जैन श्रद्धालुओं का कहना है कि पटना की धरा धन्य हो जाएगी जब हमारे गुरुदेव का धर्म चरण इस पावन भूमि पर पड़ेगी। साथ ही आचार्य श्री अपने तीर्थ यात्रा में बिहार के निर्वाण स्थली सिद्ध क्षेत्रों में से सबसे पहले पटना सिद्ध क्षेत्र पर मंगल पदार्पण करेंगे।

मध्यप्रदेश से मात्र 2 महीने 16 दिन में 1300 किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचे संत

जैन समाज से प्रवीण जैन (पटना) ने बताया कि जैन संतों का विशाल जत्था मध्यप्रदेश के तपस्थली सोनागिरि (दतिया) से 03 जनवरी 2020 को झारखण्ड स्थित तीर्थराज श्री सम्मेद शिखर जी मधुबन के लिए पद यात्रा प्रारंभ की थी। जो आज लगभग 1300 किलोमीटर पैदल चलकर अनेकों तीर्थ स्थान , राज्य , जिला से होकर धर्म यात्रा कर मात्र 2 माह 16 दिन में बिहार की राजधानी पटना पहुचेंगे।

उन्होंने कहा कि इस पदयात्रा का मुख्य संदेश सत्य , अहिंसा , मैत्री , जियो और जीने दो के साथ आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज का मुख्य नारा नमोस्तु शासन जयवंत हो है। जिस क्रम में ग्वालियर , झांसी , कानपुर , लखनऊ , अयोध्या जी , इलाहाबाद , मिर्जापुर , बनारस , काकंदी (देवरिया) , वैशाली जी आदि तीर्थ के रास्ते धर्म प्रभावना करते हुए निरंतर पद विहार कर रहे है।

 

— प्रवीण जैन (पटना)

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