एक ऐसा जैन मंदिर, जहां चंदन एवं केसर मिश्रित द्रव्य की वर्षा होती है।

एक ऐसे चमत्कारिक जैन तीर्थक्षेत्र की जानकारी दे रहे हैं, जहां अलौकिक शक्तियों की वजह से प्रत्येक सप्तमी और चौदस को चंदन और केशर की बारिश होती है। यह जैन तीर्थक्षेत्र मुक्तागिरि मध्य प्रदेश के बैतूल नगर में भैसदेही के थपोड़ा गांव में स्थिति है। इसी पावन भूमि से मुनीरों तथा साधकों ने आत्म साधना की और सर्व बंधनों से मुक्त हो मोक्ष गये, इसलिए इस तीर्थक्षेत्र का नाम मुक्तागिरि पड़ा। यहां दिगम्बर जैन धर्म के लगभग 52 मंदिर स्थित हैं।

यहां की प्राकृतिक खूबसूरती लिए  सभी मंदिर अपनी अनूठी वास्तुशिल्प के लिए दूर-दूर तक जाने जाते हैं। यह पावन और पवित्र तीर्थक्षेत्र जैन सम्प्रदाय की आस्था का केंद्र है। एक किवदंती है कि प्राचीन समय में उक्त स्थान में एक जैन मुनि ध्यानरत थे और उसी समय कहीं से उनके सामने एक मरा हुआ मेंढ़क आ गिरा। जब मुनि की आंख खुली और उन्होंने मरे मेंढ़क के कान में महामंत्र नवकार सुनाया। मंत्र सुनकर वह मेंढ़क देवता बन कर मोक्ष को प्राप्त हुआ। इसी दिन को यहां निर्वाण दिवस कहा जाता है तथा इस दिन आकाश से देवतागण चंदन और केशर मिश्रित द्रव्य की वर्षा करते हैं।

इसी पावन दिन श्रद्धालुओं को इस द्रव्य के छींटे प्रतिमाओं के ऊपर देखने को मिलते हैं। यहां के कुल 52 मंदिरों में से 10 मंदिरों में केशर और चंदन मिश्रित द्रव्य की बारिश साफ देख सकते हैं। यही कारण है कि इस क्षेत्र की श्रद्धालुओं में बहुत मान्यता ह और दर्शन करने हेतु श्रद्धालुगण दूर-दूर से यहां आते हैं।

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