हम तो कबहूँ न निज घर आये : राष्ट्र संत, आचार्य श्री ज्ञानसागर महाराज

शुक्रवार को क्षेत्रपाल जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा में आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त करते दिल्ली से आये अतिथि तथा उपस्थित श्रद्धालु।

ललितपुर। क्षेत्रपाल जैन मंदिर में विराजमान सराकोद्धारक राष्ट्र संत जैनाचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज निरंतर अपने उदबोधन में मानव कल्याण का मार्ग बता रहे हैं, उन्हें सुनने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँचकर लाभान्वित हो रहे हैं। शुक्रवार को उन्होंने अपनी दिव्य देशना में कहा कि इस संसार में अनादिकाल से परिभ्रमण करता हुआ यह जीव कभी नरकगति गया, कभी तिर्यंच गति गया, कभी देवगति, कभी मनुष्य गति में गया। इन सभी गतियों में दुःखों का अनुभव यह जीव करता है पर एक गति ऐसी है जो पंचमगति के नाम से जानी जाती है, जिसे मोक्ष कहा जाता है। संपूर्ण कर्मों के क्षय से वह मोक्ष प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि उस मोक्ष पद की प्राप्ति ए.सी. का आनंद लेते हुए नहीं होता। पांच इंद्रियों के भोगों को भोगते- भोगते नहीं होता, विषय भोगों से ऊपर उठने वाला ही उस दशा को प्राप्त करता है।

इंद्रियों के दमन, कषायों के शमन, प्रभु में मगन और स्व में रमण होने पर ही मोक्ष प्राप्त होता है।

आचार्यश्री ने कहा कि ‘हम तो कबहुँ न निज घर आये’ निज घर की प्राप्ति ही मोक्ष है। ये ईंट, पत्थर, मार्वल से निर्मित मकान घर तुम्हारे नहीं हैं, ये तो छूट जाते हैं। यहाँ तक कि यह शरीर भी किराए का घर है। शाश्वत चिन्मय महल ही तुम्हारा घर है, जो कभी नहीं छूटता और वह घर मोक्ष महल है।

उन्होंने कहा कि एयरकंडीशन की कंडीशन में कभी मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती। मोक्ष प्राप्ति के लिए सांसारिक सुख सुविधाओं से ऊपर उठना होगा। राग-द्वेष विकारी परिणति से दूर होना होगा।

इस अवसर पर आगरा से आये आचार्यश्री के भक्त रूपेश जैन ने मधुर स्वर में गुरु भक्ति  भजन प्रस्तुत किया।

सभा के प्रारंभ में बाहर से आये अतिथियों के द्वारा  आचार्य श्री सुमति सागर जी महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित किया गया।

दिल्ली से आये संजय जैन, पवन जैन, नवीन जैन, यश जैन और राजीव जैन ने आचार्यश्री के चरणों में श्रीफल समर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

इस अवसर पर अनिल अंचल,महामंत्री डॉ. अक्षय टडैया, संयोजक प्रदीप सतरवास,प्रबन्धक द्वय मोदी पंकज जैन पार्षद,राजेन्द्र थनवारा, डॉ . सुनील संचय, अक्षय अलया,मनोज बबीना, सतेंद्र जैन गदियाना, कोमल दादा, शीलचंद अनौरा, अभिषेक अनौरा, कवि वीरेन्द्र जैन विद्रोही, शिखरचंद्र जैन बंट, संजीव जैन ममता स्पोर्ट्स, पंडित ज्ञानचंद्र जैन, अरविंद जैन बरौदा, गेंदालाल सतभैया, गुलाबचंद्र सिरोन, मुकेश जैन, हुकुम चंद पवैया, कपूरचंद्र लागौन, देवेंद्र कामरा, सुनील, अरविंद जैन साढूमल, सनत जैन एडवोकेट आदि बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

शाम को ब्र. अनीता दीदी और ब्र. रेखा दीदी के मार्गदर्शन में स्वाध्याय की कक्षा, आचार्य भक्ति, आरती, प्रश्नमंच आदि में भी लोग बड़ी संख्या में भाग लेकर पुण्य संचय कर रहे हैं।

डॉ. सुनील जैन संचय

 

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