यमुना में मछुआरों के जाल में फंसकर निकली तीर्थंकर पार्श्वनाथ की प्राचीन प्रतिमा

इलाहाबाद। कौशाम्बी के यमुना गुर्बुज घाट से जैन धर्म के 23वें तीर्थकर भगवान पार्श्वनाथ की एक अति प्राचीन प्राषाण प्रमिमा के मिलने की सूचना है। जानकारी के अनुसार यमुना नदी में मछुआरों के जाल में फंसकर निकली इस प्राचीन प्रतिमा की पहचान एक जैन मंदिर के पुजारी ने ही की। बुधवार को यमुना नदी के गढ़वा कोसम इनाम गांव के सामने गुर्बुज घाट पर वहीं के मछुआरों ने मछली पकड़ने के लिए जाल डाल रखा था। इसी दौरान मछुआरों को जाल में किसी वजनी वस्तु के फंस जाने का एहसास हुआ।

जब जाल खींचा गया तो उसमें भगवान पार्श्वनाथ की अति प्राचीन प्रतिमा निकली और मछुआरों ने इसे सामान्य मूर्ति समझकर वहीं घाट के किनारे छोड दिया। जब कुछ अन्य लोग घाट पर पहुंचे तो उनकी नजर मूर्ति पर पड़ी और गांव में खबर कर दी। इसके बाद जानकारी मिलने पर कौशाम्बी स्थिति ऐतिहासिक जैन मंदिर के प्रबंधक/पुजारी दिनेश चंद्र जैन वहां पहुंचे और प्रतिमा को देखकर उन्होंने बताया कि शेषनाग की सवारी वाले सात फणों पर विराजित 23वें तीर्थकर भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा है। इसके बाद जैन धर्माम्बलंबियों का घाट पर तांता लग गया और प्रतिमा को वहां से जैन मंदिर रखवा दिया गया।

एक अनुमान के अनुसार यमुना नदी से प्रगटी उक्त प्रतिमा लगभग 1000 वर्ष पुरानी है। फिलहाल मूर्ति को यमुना घाट से ले जाकर जैन मंदिर में रख दिया गया है। इसकी जानकारी जिला प्रशासन को भी दे दी गई। इसके बाद पुरातत्व विभाग के लोग कौशाम्बी पहुंचकर प्रतिमा की प्राचीनता और महत्ता के बारे में जानकारी हासिल करेंगे। कौशाम्बी की महत्ता तथागत बुद्ध तपोस्थली के रूप में की है। कहते हैं कि यहां बुद्ध ने चातुर्मास किया था। इस प्राचीन नगरी में आज भी देश-विदेश से लोगों का आना-जाना लगा रहता है।

 

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