अहिंसा महाव्रत के पालने का पर्व है चातुर्मास वर्षायोग – आर्यिका विज्ञानमति माता जी

सागर / मप्र – आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम आशीर्वाद से समाधिस्थ आचार्यकल्प विवेकसागर जी महाराज की शिष्या आर्यिका माँ विज्ञानमति माता जी ससंघ के साथ चातुर्मास की स्थापना संबंधी समस्त क्रियाएँ गुरूवार अपरान्ह बेला में जयरामपेलेश मकरोनिया में संपन्न हुईं ।

इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए आर्यिका विज्ञानमति माता जी ने कहा कि वर्षाकाल संतों की परीक्षा का काल है जिसमें हर क्षण परीक्षा देना पड़ती है । एक बार ऐसी परीक्षा हो जाए कि हम संसार से ही पास हो जाएँ और मुक्ति को प्राप्त करें ।

इसके पूर्व आर्यिका आदित्यमति माता जी ने कहा कि अहिंसा धर्म के पालन का पर्व होता है साधुओं का चातुर्मास । सती शबरी का उदाहरण बताते हुए उन्होंने कहा कि मूक जीवों की हिंसा से संसार के सुख को प्राप्त नहीं किया जा सकता है ।

कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज व विवेक सागर जी महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन से हुआ । मंगलाचरण नरेन्द्र जैन राजस्थान,महीष मोदी तेंदूखेड़ा ,डी के जैन  टीकमगढ़ ने किया । नेहानगर सहित सकल जैन समाज सागर ने आर्यिका संघ को श्रीफल भेंट कर चातुर्मास का निवेदन किया । तत्पश्चात आर्यिका संघ ने निवेदन स्वीकार करते हुए भक्तियों के साथ आज से दीपावली तक चातुर्मास करने का संकल्प लिया ।

चातुर्मास का प्रथम कलश प्राप्त करने का सौभाग्य राकेश जैन सुरखी परिवार को , द्वितीय कलश का सौभाग्य वीरेन्द्र जैन मालथौन परिवार को , तृतीय कलश आर. के. जैन नेहानगर, वालों के परिवार को प्राप्त हुआ । इसी प्रकार संतोष जैन रहली , अनिल गांधी बागीदौरा , विकास जैन नेहानगर , अध्यक्ष अनिल जैन , नारद विलानी , राजेश कर्रापुर , धर्मेंद्र नैनधरा , ज्ञानचंद किशनगढ़ , पी सी जैन अंकुर कालोनी , दिनेश कर्रापुर को भी कलश लेने का सौभाग्य प्राप्त हुआ ।

इस अवसर समस्त धार्मिक क्रियाएँ विधि विधान से ब्रम्हचारी विजय भैया जी लखनादौन ने संपन्न कराईं । कलश स्थापना कार्यक्रम में प्रमुख रूप से राजा भैया , सुरेन्द्र मालथौन , दिनेश बिलहरा , महेन्द्र भूसा , चक्रेश सिंघई , सतीष जैन , बसंत जैन , नीलेश भूसा , मनीष जैन , रोमिल जैन , मुरली मनोहर , राजीव वर्धमान , महीष मोदी , आलोक मोदी , नीतेश जैन , अतुल जैन, आदर्श बुखारिया , रितु मालथौन , प्रज्ञा विलानी सहित बामौर कलाँ,टीकमगढ़ , भोपाल , जतारा , ललितपुर , आरोन , तेंदूखेड़ा , केसली , सुरखी , जरूवाखेड़ा ,घुआरा, खरगापुर,रहली,जैसे अनेक अंचलों व राजस्थान के विभिन्न शहरों से पधारे श्रद्धालु उपस्थित थे ।

 

-अतुल जैन

 

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