अलवर के रैणी में जैन मुनियों को जिंदा जलाने का प्रयास, जैन समाज में रोष

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जयपुर। अखिल भारतीय दिगम्बर जैन युवा एकता संघ ने मंगलवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अलवर के रैणी ग्राम में रविवार की मध्यरात्रि को हुए साजिशन जैन आचार्य और मुनि को जिंदा जलाने के प्रयास पर रोष व्यक्त करते हुए प्रदेश की कानून व्यवस्था की कड़ी आलोचना की है और मांग की है कि रविवार को मध्यरात्रि में तैनात एएसआई को तुरंत बर्खास्त किया जाए और आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाए।

राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि रैणी ग्राम के आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर (नसियांजी) में जैन आचार्य संयम सागर महाराज ससंघ का चातुर्मास चल रहा है। रविवार को मध्यरात्रि में कुछ असामाजिक तत्वों ने मन्दिर में बन रहे पंडाल में आग लगा दी, हालांकि इसमें किसी को चोट नही पहुंची किन्तु पिछले 4 माह में यह दूसरा ऐसा मामला है जब जैन आचार्य पर इस तरह आत्मघाती हमला किया गया है। इससे पूर्व में भी उन असामाजिक तत्वों ने जैन नसियां पर कब्जा करने के उद्देश्य से जैन आचार्य पर हमला किया था उसमें भी जैन आचार्य बाल-बाल बचे थे। इस घटना के बाद भी रैणी पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी किन्तु कोई कार्यवाही नही होने के चलते जैनाचार्य, मुनि और रैणी जैन समाज को धरना देने पर मजबूर होना पड़ा था, उसके बाद पुलिस प्रशासन ने पूरी सुरक्षा का आश्वासन दिया था। किंतु आरोपियों को पकड़ने के बजाय समाज के लोगो को ही प्रताड़ित किया जाने लगा, समाज के प्रतिनिधियों पर ही पुलिस प्रशासन ने सवाल खड़े करने लगी।

अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि मामला जैन मंदिर और उसकी संपत्ति से जुड़ा हुआ है कुछ सामाजिक तत्व लोग मन्दिर और मन्दिर की भूमि पर कब्जा करना चाहते है जिसको लेकर आये दिन विवाद होता रहता है, हर बार प्रशासन की शरण ली जाती है किंतु प्रशासन समाज का सहयोग करने के बजाय अपराधियों को संरक्षण देता रहा है जिसके चलते आज यह स्थिति आ गई कि आरोपी जैन साधुओं पर ही आत्मघाती हमले करवाने लगे। रैणी ग्राम में स्थित जैन नसियां अति प्राचीन है जिसकी सुरक्षा और संरक्षण करना समाज की, साधु – संतों की जिम्मेदारी है, उसे कैसे दूसरों के हवाले किया जा सकता है।

जैन ने कहा कि प्रदेश में सुरक्षा को लेकर बहुत ही विकट स्थिति हो गई है। सरकार को केवल वोटों की चिंता है लोगो की नही, भारत देश पूरे विश्व मे एकमात्र ऐसा देश है जिसे धर्म प्रधान देश कहा जाता है साधु-संतों और गुरुजनों को भगवान का दर्जा दिया जाता है उस देश के प्रदेश में जब साधु संत ही सुरक्षित नही जिन्होंने अपने सुख – वैभव का त्याग कर, सांसारिक जीवन से नाता तोड़ दिया हो उन्ही पर जानलेवा हमले हो रहे, बार- बार मारने के प्रयास किये जा रहे है तो ऐसे में कैसे प्रदेश की जनता अपने आपको सुरक्षित महसूस करेंगी कैसे प्रदेश के कानून पर विश्वास करेगी जो स्वयं आरोपियों को संरक्षण दिए बैठी है।

अखिल भारतीय दिगम्बर जैन युवा एकता संघ राज्य सरकार और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मांग करती है कि वह इस मामले पर स्वयं संज्ञान लेंवे और आरोपी पुलिस ऑफिसर और अपराधियों पर कार्यवाही कर समाज को न्याय दिलवाए, अन्यथा जैन समाज चुप नही बैठेंगे समाज अपने संतो की सुरक्षा करना जानती है। समाज को न्याय नही मिला तो राष्ट्रव्यापी जनांदोलन भी किया जा सकता है। जैन समाज अहिंसा प्रधान धर्म है इसका मतलब यह नही वह कायर है। वह अपने हक की लड़ाई लड़ना भी जानता है और साधु-संतों की सुरक्षा करना भी जानता है।

           — अतुल जैन

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