सुबह किया मंदिर में इंद्र के रूप में नृत्य, शाम को साक्षात भगवान के चरणों में

आज से 18 वर्ष पूर्व श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, छोटा बाजार, शाहदरा में मुनिश्री श्रुतसागर जी के पावन सानिध्य में पयुषर्ण पर्व के कार्यक्रम हर्षउल्लास के सम्पन्न किये जा रहे थे। त्रयोदशी का दिन था प्रात:काल से ही श्रद्धालु पूजा-अर्चना में भक्तिभाव से सरोबार थे। इन्हीं में एक श्रद्धालु मोहनलाल जैन जी भी पूरे भावों और श्रद्धाभक्ति के साथ पूजा-अर्चना में लीन थे। संगीतमयी पूजा के बीच-बीच में प्रस्तुत भजनों पर मोहनलाल जी भक्तिभाव से नृत्य करने लगते थे।  विधि पूर्वक पूजा समापन के बाद वे मुनिश्री श्रुतसागर जी के पास गये और उनसे ऐसा आशीर्वाद मांगा कि मेरे अंतिम समय में मुझे किसी का सहारा न लेना पड़े और न ही किसी से कुछ न कराना पड़े। ऐसे पुण्यात्मा को दिया गया आशीर्वाद पूर्णतया सत्य हुआ।  उसी दिन 4 सितम्बर को सायं दुकान से आते समय उनके दिल में दर्द होने लगा और घर पर पहुंचते ही वह जोर-जोर से महामंत्र नवकार का जाप करने लगे। णमोमार मंत्र जपते-जपते उन्होंने अपना शरीर के त्याग कर दिया। मुनिश्री का दिया और मोहनलाल जी का मांगा आशीर्वाद सत-प्रतिशत सत्य हो गया। उसी दिन से उनकी पुण्य स्मृति में उनकी धर्मपत्नी संतोष जैन एवं परिवारीजन प्रत्येक पयूषर्ण पर्व के किसी भी एक दिन धार्मिक प्रश्न मंच का कार्यक्रम आयोजित कराते आ रहे हैं, जिसमें बड़ों से लेकर महिलाएं और बच्चे भी बड़ी संख्या में भाग लेते हैं। प्रश्नमंच में जीतने वाले प्रत्येक प्रतिभागी को उपहार प्रदान किया जाता है।  इसी श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए कल दिनांक 10 सितम्बर को पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, छोटा बाजार, शाहदरा में स्व. लाला मोहनलाल जैन की पुण्य स्मृति में प्रात:कालीन मुनि सुव्रतनाथ जी का विधान एवं रात्रि में प्रश्न मंच का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें आप सभी शामिल होकर धर्म लाभ ले।

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