असफलता से घबराएं नहीं : सराकोद्धारक आचार्य ज्ञानसागर

ललितपुर। श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र क्षेत्रपाल जी ललितपुर( उत्तर प्रदेश) में सराकोद्धारक आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज, मुनि श्री ज्ञेयसागर जी महाराज  के पावन सान्निध्य में 53वीं जैन कैरियर काउंसलिंग का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण व दीप प्रज्वलन से हुआ। दीप प्रज्वलन के उपरांत ललितपुर विधायक श्री रामरतन कुशवाहा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पूज्य आचार्य श्री ज्ञानसागर जी के दर्शन कर बहुत अच्छा लगा। आचार्यश्री के सान्निध्य में आज जो यह कैरियर काउंसलिंग होने जा रही है यह बहुत अच्छा कार्य है। इस काउंसलिंग से छात्रों को जो दिशाबोध मिलेगा, वह छात्रों के जीवन में प्रकाश का कार्य करेगा।
तत्पश्चात श्री रितेश जी जैन, काउंसलर (डायरेक्टर टाइम्स ग्रुप ग़ाज़ियाबाद) ने कॅरियर काउंसलिग में उपस्थित सैकड़ों प्रतिभागियों को कॅरियर के टिप्स देते हुए कहा कि  आज के छात्रों  के कंधों पर ही देश का भविष्य टिका है। अतः आज के छात्रों को संस्कारित, कर्तव्यनिष्ठ, सत्यनिष्ठ, चारित्रनिष्ठ  होना बहुत जरूरी है। जागरूक होना जरूरी है। अंदर से आत्मविश्वास से लबरेज रहना जरूरी है। आप अगर अपनी मेमोरी बढ़ाना चाहते हैं, तो प्रथम आवश्यकता है एकाग्रता की, पॉजिटिव सोच की, कुछ कर गुजरने की भावना की।
काउंसलर ने कहा कि जिसकी नैतिक शिक्षा अच्छी होती है, वह सभी क्षेत्रों में सफल होता है। आप सभी का उद्देश्य मात्र खान पीना, सोना नहीं होना चाहिए। आपका उद्देश्य अपने व्यक्तित्व को निखारना होना चाहिए। काउंसलर रितेश जैन  ने बीच-बीच में छात्र-छात्राओं से अनेक प्रश्न पूछे, उनका छात्र-छात्राओं ने अपनी बुद्धि-क्षमता के अनुसार जवाब दिया। माता- पिताओं को प्रेरित किया कि आप स्वयं तो मंदिर चले जाते हैं, आहार देने चले जाते हैं, अभिषेक देखने-करने आते हैं। पर बच्चों को साथ नहीं ले जाते हैं, आप अपने बच्चों को जब पहली बार स्कूल भेजते हैं तो वह खुश होकर जाते हैं या रोते हैं? आप कहेंगे वह रोते हैं। बहुत कम बच्चे ऐसे होते हैं जो खुश होकर जाते हैं। ठीक इसी प्रकार आप जब बच्चों को मंदिर, गुरुओं के पास भेजोगे तो यह जरूरी नहीं है कि वह खुश होकर ही जाएंगे, कई बच्चे जोर -जबरदस्ती से जाते हैं और कई प्यार से जाते हैं। पर यह हम सब माता-पिता की जिम्मेदारी है कि हम अपने बच्चों को मंदिर और साधू- संतों के पास अवश्य भेजें ताकि आपके बच्चों के अंदर धार्मिक भावनाओं का संचार हो सके। बचपन के संस्कार जीवनभर काम आते हैं।
आचार्यश्री ने एक प्रश्न सभी के सामने रखा की क्या जहां हम रहते हैं वहां अच्छे से पढ़ाई नहीं होती? क्या  पढ़ाई केवल दिल्ली, बेंगलुरु, पुणे, मुंबई आदि स्थानों में होती है। इसका उत्तर देते हुए काउंसलर ने कहा कि ऐसा जरुरी नहीं है कि पढ़ाई बाहर ही जाकर हो सकती है। आप जहां भी रहते हैं वहां पर अगर पूरी लगन और रूचि के साथ पढ़ें तो आप कहीं भी रह कर सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
इस अवसर पर संघस्थ ब्र. अनीता दीदी जी ने सभी छात्रों से कहा आप सभी चाहें तो अच्छे कार्य करके अपनी जिंदगी को खूबसूरत बना सकते हैं और चाहे तो बुरे कर्म कर के जिंदगी को बदसूरत बना सकते हैं। यह आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप जिंदगी को कैसा बनाना चाहते हैं। पूज्यश्री का सभी से यह कहना है कि आप सभी ऐसा कोई कदम नहीं उठाना जिससे आपका नाम ,आपके माता- पिता का नाम बदनाम हो।
तत्पश्चात आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज ने अपनी पीयूष वाणी द्वारा कहा कि जिंदगी में कभी भी अपने मां पिता को ठुकराना नहीं। भारत देश की संस्कृति सेवा, परोपकार, अहिंसा, सत्य, तप, त्याग की संस्कृति है। आप सभी छात्र छात्राओं से अपेक्षा है कि -आप सभी नशीले पदार्थों से दूर रहे।भौतिक संसाधनों का दुरुपयोग ना करें। 24 घंटे में एक बार प्रभु के दर्शन करने अवश्य जाएं। कैसी भी परिस्थिति आए कभी गलत कदम मत उठाना।
अगर किसी कारण से अच्छे नंबर नहीं आए तो माता-पिता अपने बच्चों को बहुत अधिक टॉर्चर ना करें उनसे कहें कि -बेटा कोई बात नहीं जितना नंबर लाए ठीक हैं। मैं तुम्हारे साथ हूं।कभी भी जीवन में निराश मत होना, उदास मत होना। जिंदगी एक संघर्ष है चलती रहेगी कभी अपने जीवन का अंदाज मत खोना।
 पूज्यश्री ने सभी छात्रों को प्रेरित किया कि जिस प्रकार आप अपने मोबाइल को चार्ज करते हैं चार्जर के माध्यम से; वैसे ही जीवन रूपी मोबाइल को प्रभु रूपी चार्जर के पास जाकर चार्ज करो।आप सभी अपने अंदर आत्मविश्वास जगाएं की हम जो कुछ चाहे वह हम कर सकते हैं। इस कार्यक्रम में आप सभी भीषण गर्मी में आकर सम्मिलित हुए यह सब आप सब की धार्मिक रूचि का ही परिणाम है।
इस अवसर पर राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक बालकिशन नायक, रूपनारायण निरंजन,  रविनारायण चौबे, नेहरू महाविद्यालय के प्राचार्य अवधेश अग्रवाल, जयशंकर प्रसाद द्विवेदी, जनक किशोरी शर्मा, कमल हाथीशाह, जैन पंचायत के अध्यक्ष अनिल अंचल, महामंत्री डॉ अक्षय टडैया आदि ने संबोधित कर बच्चों को मार्गदर्शन किया और ऐसे आयोजनों को जरूरी बताया।
काउंसलिग के समापन पर सत्र में  अपर जिलाधिकारी श्री योगेश बहादुर सिंह ने भी बच्चों को  बेहतर भविष्य के लिए अनेक टिप्स प्रदान किये।
इस अवसर पर  जैन पंचायत के अध्यक्ष अनिल अंचल,  महामंत्री डाॅ. अक्षय टडै़या, प्रबन्धक द्वय  राजेन्द्र लल्लू थनवारा, मोदी पंकज जैन पार्षद , शीलचंद्र अनौरा, सीए सौरभ जैन, विकास ओसवाल, अवध बिहारी कौशिक, रवि राय, केपी पांडे, सुंदर लाल अनौरा, संयोजक प्रदीप सतरवास, उपाध्यक्ष मीना इमलिया, अजय जैन,  मनोज बबीना,  अक्षय अलया,सतीश जैन, संजीव जैन ममता स्पोर्ट्स, डॉ सुनील संचय, सतेंद्र जैन गदयाना,जिनेंद्र जैन  डिस्को ,अभिषेक अनौरा,गेंदालाल सतभैया, संजय मोदी, वीरेंद्र विद्रोही, अखिलेश गदयाना,जिनेंद्र थनवारा,  डॉ सुनील जमादार, पत्रकार अजय बरया, नरेंद्र कलेक्ट्रेट, वैभव जैन टिन्ना,सनत खजुरिया, श्रेयांस रेल्वे, प्रभात लागौन,महेन्द जैन पंचमनगर,नरेंद्र राजश्री, अनिल जैन मामा भांजा, सुरेश बाबू जैन, अनिल जैन, सुनील कामरा,सुरेन्द्र जैन शास्त्री, पंडित शीतल चंद्र जैन, पंडित वीरेंद्र जैन आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। अनेक शिक्षण संस्थाओं, कोचिंग सेंटर के गणमान्य लोग भी इस अवसर पर उपस्थित रहे। आयोजन को सफल बनाने में जैन पंचायत के साथ ही  जैन शिक्षकों , जैन मिलन आदि का उल्लेखनीय योगदान रहा। जिसमें प्रमुख हैं सतेंद्र गदयाना, जितेंद्र जैन राजू, देवेंद्र जैन सिरोन,शीलचंद्र जैन शास्त्री, विकास सिंघई एबीआरसी, धीरेन्द्र जैन, दीप्ति जैन,  प्रफुल्ल जैन, राहुल जैन, अमित जैन सिंघई, डॉ सुनील संचय, पुष्पेन्द्र जैन,अनूप चौधरी,  अमित जैन, अंतिम जैन, अमृता लोहिया, प्रतीक लोहिया, रोहित जैन, नेहा जैन , अंकित जैन, मनीष पवैया,मनीषा जैन, संदीप जैन आदि प्रमुख हैं।
काउंसलिग में छात्र-छात्राओं के अनुभव :
-काउंसलिग में सीखा कि यदि अपने जीवन में पढ़-लिखकर अच्छी नौकरी पाना है, तो इसके लिए जरूरी नहीं है कि बाहर किसी बड़े शहर में जाकर महंगी शिक्षा लें।-दिव्या जैन, एम एस सी छात्रा
-केवल भीड़ के पीछे नहीं भागना चाहिए। हमारी जिस क्षेत्र में रुचि है, उसी क्षेत्र में कार्यक्षेत्र बनाने का प्रयास करना चाहिए।- सौम्या जैन, 12वीं पास छात्रा।
– काउंसलिग में हमने सीखा कि जीवन में सफलता प्राप्त करनी है तो लक्ष्य निर्धारित करना जरूरी है।-हार्दिक जैन, बीए प्रथम वर्ष छात्र
काउंसलिग में हमें बताया गया कि असफलता के कारण हताश होकर अपना मनोबल नहीं तोड़ना चाहिए।-श्रुति जैन, 11वीं की छात्रा।

 

 डॉ. सुनील जैन संचय, ललितपुर

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