जैन समाज के 8 महीनों के कठिन प्रयासों के बाद मिली भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा

राजस्थान में सीकर नगर के खंडेला गोरियां के दूधवालों के बांस खेत में जून, 2018 को हुई जुताई के दौरान जैन धर्म के 23वें तीर्थकर भगवान पार्श्वनाथ जी की लगभग 1.5 फुटी लंबी एवं 9 इंच चौडी लगभग 8वीं शताब्दी की प्रगट हुई थी, जिसे प्रशासन से प्राप्त करने के लिए जैन समाज के वरिष्ठ लोग काफी दिनों से प्रयासरत थे।

लगभग 8-9 माह बाद कलेक्टर सीआर मीणा ने उक्त प्रतिमा को जैन समाज के सुपुर्द कर पूजा एवं विधिवत रूप से श्री खंडेलवाल दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र खंडेला सेवा संस्थान खंडेला सीकर के नाम आदेश दिया। आदेश मिलते ही जैन समाज में खुशी की लहर दौड़ गई। 27 मार्च को खंडेलवाल अतिशय क्षेत्र खंडेला के समस्त सदस्य एवं सीकर जैन समाज तीन गोठ के अध्यक्ष मंत्री एवं सकल दिगम्बर जैन समाज के वरिष्ठ लोग प्रतिमा को खंडेला पुलिस थाने से ले आये। थाने से मिलने के बाद देवीपुरा स्थित श्री चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर में रखा गया।

इस अवसर पर जैन समाज के लोगों से आरती एवं भक्तिमय वातावरण गुंजायमान कर दिया। बताया गया कि लगभग 8-9 माह पूर्व भूगर्भ से निकली भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा को शोभायात्रा के साथ दंग की नसिया, श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर लाया गया। दंग की नसिया में प्रतिमा विराजमान की जाएगी।

भविष्य में मूर्ति की स्थापना पंचकल्याणक करवाकर खंडेवा में की जाएगी। मंदिर में प्रतिमा को बॉक्स में विराजित करने का सौभाग्य कमल कुमार, विवेक कुमार पाटोदी परिवार को मिला। प्रतिमा को जुलूस के रूप में लाने का सौभाग्य माणकचंद आशीष जयपुरिया परिवार को एवं आरती करने का सौभाग्य भंवरलाल सुरेश पाटनी जी परिवार को मिला।

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