मां-बेटी समेत 4 युवतियां सांसारिक जीवन त्याग सन्यासिन बनी, उन्हें देखने उमड़े श्रद्धालु

पानीपत, 1 फरवरी का दिन पानीपत के लिए धार्मिक आस्था और श्रद्धा से परिपूर्ण रहा क्योंकि मां-बेटी एवं 2 बेटियों समेत कुल 4 जिसमें राजरानी, चहल, पूनम जैन, एकता चहल और कोमल जैन ने सांसारिक जीवन को त्याग संयमित तपस्वी जीवन जीने के पथ पर आगे बढ़ने की दीक्षा ग्रहण कर ली। जैन भगवती दीक्षा समारोह गांधी मंडी में इन चारों को जैन आचार्य संत सुभद्रमुनि जी ने दीक्षा प्रदान की। इस अवसर पर अनेक जैन संतों-साध्वियों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। इस अवसर पर श्वेताम्बर मूर्तिपूजक जैन संत धर्मधुरंधर भी दीक्षार्थियों को मंगल आशीर्वाद देने पहुंचे।

प्रात: 09.00 बजे हुडा सेक्टर, 12 डीएवी स्कूल के पास स्थित महावीर प्रसाद, राजेश जैन के निवास से दीक्षार्थियों के साथ विशाल शोभायात्रा बैंडबाजों के साथ शुरू हुई। शोभायात्रा में श्रावक-श्राविकाओं सहित श्रद्धालु नाचते, गाते दीक्षा स्थल पहुंचे। इस अवसर पर धर्मधुरंधर मुनि ने कहा कि नींव के जुड़े पत्थर का जिस प्रकार महत्व है, उसी प्रकार संयक पथ पर चलने के लिए कर्मो का क्षय करने के लिए दीक्षा लेना अनिवार्य है। दीक्षार्थी एकता जैन ने कहा कि आज मेरा सपना साकार होने का दिन है। जींद के बड़ौदी का इतिहास रहा है कि इस गांव ने वीरांगनाओं को जन्मा है। इससे पूर्व मेरे पिता, भाई और दो बहनें पहले ही इस पथ पर अग्रसर हो चुके हैं और आज मेरी मां राजरानी और मैं इस पथ पर चलने की दीक्षा ग्रहण कर रही हूं।

उन्होंने कहा कि संयक का पथ अंगारे पर चलने का मार्ग है और हम किसी दवाब में यह मार्ग नहीं चुन रहे हैं बल्कि अपने संकल्प के तहत इस पथ पर जा रहे हैं। इसकेक बाद दीक्षार्थी पूनम जैन तथा एकता चहल ने इसे अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दिन बताया। पूनम जैन ने कहा कि मुझे इस दिन का बेसव्री से इंतजार था। अब मेरे शून्य जीवन के महकने और लहराने के दिन आ गये हैं। उल्लसित पूनम ने परिवार सहित साधु-साध्वियों का आभार व्यक्त करते हुए संयम के पथ पर चलने की कामना की।

राजसी वस्त्रों से सुशोभित शोभायात्रा के बाद पहुंचे दीक्षार्थियों को औधा प्रदान किया गया तत्पश्चात केशलोचन के बाद उन्होंने साध्वी का वेश धारण किया। एकता चहल के धर्म भाई सुमित ने राखी बंधवाई। इसके बाद जैन संत सुभद्र ने चारों दीक्षार्थियों का नामकरण किया। समारोह में महावीर प्रसाद ने ध्वजारोहण किया। कार्यक्रम के मुख्यअतिथि सुभाष (दिल्ली) थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विजय जैन ने की और संचालन डा. ईर चंद्र ने किया।

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