भोग प्रधान नहीं, योग प्रधान है भारतीय संस्कृति : आचार्य ज्ञान सागर

उत्तराखंड की पावन भूमि पर विहाररत आचार्यश्री ज्ञान सागर जी महाराज बद्रीनाथ धाम तक की यात्रा पर हैं। विहार के दौरान विहार के दौरान उत्तराखंड के श्रीनगर में दो दिवसीय प्रवास किया। आचार्यश्री से मिलने गढ़वाल केंद्रीय विवि के कुलपति प्रो. जवाहरलाल कौल, एनआईटी के रजिस्ट्रार कर्नल सुखपाल सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष विपिन चंद्र मैठाणी, इतिहासकार डा. शिव प्रसाद नैथानी पहुंचे और देश और राज्य के मुददों पर विस्तार से चर्चा की और आचार्यश्री ने उनकी सभी शंकाओं का समाधान किया। इस अवसर पर आचार्यश्री ने कहा कि आदिकाल से भारतीय संस्कृति भोग प्रधान नहीं अपितु योग प्रधान रही है। देवभूमि उत्तराखंड में पूर्ण शराबबंदी होनी चाहिए और शराब, मीट-मांस का प्रचलन होने से देवभूमि में कुछ विसंगतियां आई हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थल जितने पवित्र और पावन रहेंगे, भक्त उतने ही स्वस्थ्य और समृद्ध बनेंगे। आचार्यश्री ने कहा कि शाकाहार भोजन स्वस्थ्य जीवन का आधार होता है। व्यसन/नशा मुक्त समाज बने, जैन धर्म की यही अवधारणा है।

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