जैनों के खानपान, रहन-सहन पर भारत आकर 20 विदेशी डाक्टरों की टीम करेगी रिसर्च।


देश और विदेश में रह रहे जैन समुदाय के लोगों द्वारा सूर्यास्त के बाद भोजन ग्रहण न करना, शुद्ध और शाकाहारी भोजन ग्रहण करने के बावजूद स्वास्थ्य और स्फूर्ति की दृष्टि से अति-उत्तम बने रहना देश ही नहीं विदेश के बड़े-बड़े डाक्टरों के लिए कौतूहल का विषय बना हुआ है और वे इस पर रिसर्च करना चाहते हैं। उनकी यह सोच कि अच्छे स्वस्थ्य बने रहने के लिए मांसाहार जरूरी है, उनकी इस सोच को शाकाहारी जैन समुदाय ने गलत साबित कर दिखाया है।

पेरिस स्थित चिक्तिसीय क्षेत्र में कार्यरत दुनिया की एक महत्वपूर्ण संस्था सोसायटी ऑफ थैरापटिक एजूकेशन ऑफ जनरल प्रक्टीटय़ोनर्स ने फ्रांस एवं स्विटजरलेंड के  20 नामी डाक्टरों की एक टीम को भारत भेजा जा रहा है, जो जैन समुदाय के खान-पान, रहन-सहन पर रिसर्च कर यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि शुद्ध और शाकाहारी होते हुए भी हर दृष्टि से स्वस्थ्य और उत्तम कैसे बने रहते हैं। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है, जब किसी धर्म विशेष से जुड़े लोगों की लाइफ-स्टायल और खान-पान पर रिसर्च की जा रही हो।

विदेशी डाक्टरों की उक्त टीम भारत के गुजरात में अहमदाबाद, पालिताना, पोरबंदर, पाटन, जाम नगर सहित  राजस्थान के माउंट आबू, उदयपुर का दौरा करेगी। टीम लगभग दो सप्ताह तक जैन समुदाय के जानकारों और जैन समुदाय से जुड़े लोगों से बातचीत करेगी। इसके अलावा जैन समुदाय के मंदिरों एवं जैन लाइब्रेरी से अति प्राचीन जैन ग्रंथों से भी धर्म के बारे में जानकारी प्राप्त करेगी। इसके अलावा उकत रिसर्च टीम जैन धर्म की पारंपरिक विचारधारा, खान-पान, रहन-सहन के बारे में भी गहन अध्ययन करेगी।


Comments

comments