ताला खोला- भीकनपुर की जैन प्रतिमाएं समाज को सुपुर्द

जैन संत सुबल सागर सहित अन्य संत मंडल का संकल्प पूर्ण, गूंजे जयकारे, बनेगा भव्य तीर्थस्थल
उज्जैन। जिले की खाचरौद तहसील से ८ किलो मीटर दूर भीकमपुर गांव में गुरुवार शाम से अन्न जल त्यागकर ८०० वर्ष पुरानी दिगम्बर जैन प्रतिमा तालेबंदी से मुक्त करने तथा इन्हें पूजा पाठ के लिए विधि विधान से मंदिर में स्थापित करने की मांग कर रहे आचार्य सुबलसागर महाराज तथा उनके साथ मौके पर आचार्य असंगसागर, आचार्य अनंग सागर व अन्य मुनीगण तथा साध्वी मंडल को शनिवार सुबह ९ बजे अपने संकल्प पूर्ण होने पर सर्वाधिक प्रसन्नता हुई जब प्रशासन की ओर से खाचरौद तहसीलदार एन.एन. पांडे तथा खाचरौद थाना प्रभारी दिनेश वर्मा चाबी लेकर मौके पर पहुंचे तथा प्रतिमाओं को ताले से मुक्त करते हुए चाबियां जैन समाज को सुपुर्द कर दी।

आचार्यश्री द्वारा लगातार ४० घंटे से अधिक अन्न, जल त्यागकर मौके पर ही बैठना पड़ा कि प्रशासन पूजन अर्चन प्रक्षालन के लिए इन दुर्लभ प्रतिमाओं को जैन समाज को सुपुर्द करें। जब प्रशासन ने चाबी सौंपी तो जय जय गुरुदेव के गगनभेदी जयकारे गुंजायमान हो गए। इस अवसर पर इंदौर के प्रदीप बडज़ात्या खाचरौद के विजय सेठी, शाजापुर के पूर्व विधायक नेमीचंद जैन अकोदिया, नागदा के सुनील जैन तथा भाजपा मंडल अध्यक्ष राजेन्द्र धाकड़ भी मौजूद थे। क्षेत्रीय भाजपा विधायक दिलीप शेखावत की भी इस मामले में काफी सकारात्मक -सहयोगात्मक भूमिका रही।

१० बीघा जमीन पर मंदिर का प्रस्ताव
आचार्यश्री ने कहा कि खुदाई में मिली यह ८०० वर्ष पुरानी भगवान नेमीनाथ, चंदा प्रभुजी, पाश्र्वनाथ सहित अन्य तीर्थंकरों की प्रतिमाओं के लिए भीकनपुर में ही भव्य मंदिर तथा तीर्थ क्षेत्र विकसित करने की बात कही। साथ ही यहां दस-बारह बीघा भूमि पर तीर्थ क्षेंत्र में मंदिर, धर्मशाला, अस्पताल, भोजनशाला बनाने को कहा।

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