विश्व में Jainism शोध का विषय है – Acharya Vidyasagar

सतना जैन समाज ने चढ़ाया श्रीफल

भोपाल। भोपाल में चातुर्मास कर रहे आचार्य विद्यासागर जी महाराज का कहना है कि जैन दर्शन काफी सूक्ष्म है और पूरे विश्व के लिए शोध का विषय बना हुआ है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अपनी उपलब्धियों पर गर्व कर सकते हैं, लेकिन प्रकृति के बारे में जितना जैन धर्म में विस्तार से बताया गया है वह कहीं अन्य में देखने को नहीं मिलता। आचार्यश्री मंगलवार को हबीबगंज जैन मंदिर में प्रवचन कर रहे थे। इस अवसर पर सतना से आए 40 से अधिक श्रावकों ने आचार्यश्री को श्रीफल भेंट कर उनके सानिध्य में सतना में पंच कल्याणक कराने का अनुरोध किया।

मंगलवार को भी आचार्यश्री के दर्शन करने के लिए भक्तों का तांता लगा रहा। लखनऊ के पुलिस महानिरीक्षक प्रमोद पांडे ने आचार्यश्री को श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया। चंडीगढ़ से पधारे अनेक लोगों ने आचार्यश्री से आशीर्वाद लेकर उन्हें चंडीगढ़ की और आने का निवेदन किया। सतना जैन समाज ने अजय जैन स्वास्तिक के नेतृत्व में आचार्यश्री को शास्त्र भेंट किया और भक्तिभाव से आचार्यश्री की पूजन की। आचार्यश्री के पाद प्रच्छालन करने का सौभाग्य नंदूबार महाराष्ट्र से आए पंकज जैन परिवार को प्राप्त हुआ। भोपाल के दानिशकुंज जैन समाज ने बोली लेकर आचार्यश्री को शास्त्र भेंट किया। समाज के अध्यक्ष तेजकुमार टोंग्या ने आचार्यश्री से दानिशकुंज में भी पधारने का आग्रह किया।

इस अवसर पर अपने आर्शीवचन में आचार्यश्री ने कहा कि प्रत्येक जीव का परिणमन होता रहता है। उसकी पर्याय बदलती रहती है, लेकिन हमे महसूस नहीं हो पाता। जल जब तक मेघों के रूप में रहता है वह जलकाय कहलाता है, लेकिन बारिश के रूप में पृथ्वी पर आते ही वह पृथ्वीकाय की योग्यता प्राप्त कर लेता है। उन्होंने कहा कि यही जल मेघो में रहते हुए जब बिजली के रूप में कोंधता है तो अग्निकाय का रूप ले लेता है। यही जल जब समुद्र में पहुंचता है और सीप के मुख में जाता है तो मोती बन जाता है। उन्होंने कहा कि यही जल सर्प के मुख में जाकर विष बनता है और गन्ने की जड़ों में जाकर गन्ने का रस बनकर तीर्थंकरों के आहार के कार्य में भी उपयोगी होता है। उन्होंने कहा कि एक ही जीव ने कई पर्याय बदलीं और अलग-अलग रूप धारण किए। ऐसा ही हमारे आपके जीवन में भी घटित होता रहता है।  हमें क्या बनना है यह चिंतन और साधना का विषय है। आचार्यश्री ने भक्तों से कहा कि आयोजक आपसे बेशक कहते हों कि आप प्रवचन आने का कष्ट करें, लेकिन हमारी भाषा ऐसी नहीं है। हम तो आपसे कहेंगे कि आप प्रवचन में आकर अपने ऊपर कृपा करो।

प्रफुल्ल के यहां हुए आचार्यश्री के आहार

मंगलवार को आचार्यश्री के आहार सुलोचना जैन, विकास जैन, प्रफुल्ल जैन साकेतनगर भोपाल वालों के चौके में हुए।

 

  • रवीन्द्र जैन

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