एक ऐसा जाट परिवार जिसका हर सदस्य बन जाएगा जैन संत एवं साध्वी

यदि किसी भी धर्म के प्रति गहरी श्रद्धा भक्ति और धर्म सच्चा अर्थ समझ में आ जाये तो उसके आगे धर्म, जाति कोई महत्व नहीं रखती। ऐसी ही एक घटना घटित हो चुकी है और पुन: फिर होने जा रही है। पानीपत नगर में एक जाट समुदाय का ऐसा परिवार है, जिसको जैन धर्म के प्रति इतनी श्रद्धा बढ़ी कि परिवार के 4 सदस्य पहले ही जैन सन्यासी दीक्षा ग्रहण कर चुके हैं और अब 4 और वैरागिन दीक्षा ग्रहण करने जा रही है, जिसमें एक मां-बेटी हैं। यानी परिवार का हर सदस्य संत-साध्वी होने जा रहा है।

नगर की गांधी मंडी में 1 फरवरी को दीक्षा समारोह में इन्हें दीक्षा प्रदान की जाएगी। साध्वी बनने से पहले वैराग्य धारण करने वाली युवतियों का एक धर्म परिवार बनता है, जो शादी की सम्पूर्ण रस्में पूरी करता है। आचार्य सुभद्र मुनि इन 3 युवतियों सहित 1 महिला वैरागिन को दीक्षा ग्रहण कराएंगे। साध्वी बनने जा रही राजरानी का विवाह जींद (बड़ौदी) में हुआ है। इनके पुत्र और 2 पुत्रियों सहित पति पहले ही सन्यासी जीवन की दीक्षा ले चुके हैं और अब स्वयं राजरानी एवं उनकी तीसरी पुत्री एकता चलह दीक्षा ग्रहण करने जा रही हैं। एक अन्य पूनम जैन निवासी डाहर पुत्री ओमप्रकाश जैन भी इसी समाराह में दीक्षा ग्रहण करेंगी।

पूनम जैन धर्म के दशवै कालिक सूत्र, प्रतिक्रमण सूत्र, 25 बोल सहित विभिन्न स्त्रोतों का अध्ययन कर चुकी हैं। इनके अलावा एक अन्य कोमल सोनीपत निवासी एवं स्व. अशोक कुमार तोमर की पुत्री कोमल जैन भी दीक्षा ग्रहण करने जा रही हैं। कोमल जैन ने भी दसवै कालिक सूत्र, आवश्यक सूत्र, वीरत्थुई, निम पव्वज्जा, अनतगढ़ सूत्र के 3 वर्ग, 25 बोल, 33 बोल, 67 बोल, 40 बोल, तीर्थकर प्राप्ति के 20 बोल, मेरी भावना, बारह भावना, रत्नाकर पच्चीसी, लघु साधु वंदना, भक्ताम्बर स्त्रोत्र, कल्याण मंदिर स्त्रोत्र सहित पदमावती स्त्रोत्र, में पारंगत हैं।

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