केशलोच क्रिया करने से मुनि की वैराग्य की पुष्टि होती है: विराग सागर


मध्य प्रदेश के भिंड नगर में स्थित बतासा बाजार चैत्यालय जैन मंदिर में चातुर्मास कर रहे गणाचार्य विराग सागर जी महाराज ने अपना केशलोच क्रिया पूर्ण की। केशलोच क्रिया के दौरान श्रद्धालुओं ने णमोकार मंत्र का जाप किया। केशलोच क्रिया पूर्ण होने के बाद गणाचार्य विराग सागर जी महाराज ने कहा कि केशलोच क्रिया करने से मुनि की वैराग्य की पुष्टि होती है। मुनि को कितने भी कर्म क्यों न आ जाएं केशलोच क्रिया अनिवार्य होती है। जैन मुनि 4 महीने में एक बार केशलोच करते हैं। इस बारे में उन्होंने कहा कि इससे अधिक समय में बाल अधिक बढ़ जाते हैं, जिससे उनमें जीव पड़ने की अत्याधिक संभावना रहती है। इससे शरीर का ममत्व भाव घटता है। उन्होंने कहा कि देश में जैन साधुओं की संख्या कम है। देश में 80-90 लाख साधुओं में जैन मुनि लगभग पांच से छह हजार के बीच ही हैं। मुनिश्री ने कहा कि हीरे-मोती की दुकानें कम ही होती हैं। जब अनंत भवों का पुण्य होता है तब कोई जैन मुनि बनता है। जैन मुनि की सबसे कठिन क्रिया केशलोच होती है।


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