उत्तर प्रदेश में पहली बार होने वाला जैन संतों का महाकुंभ, तैयारी जोरों पर

उत्तर प्रदेश के झांसी नगर स्थित भव्य जैन तीर्थस्थल करगुवां में जैन संतों का महाकुंभ होने जा रहा है। इससे पूर्व इतने वृहत्त स्तर पर जैन संतों के महाकुंभ का आयोजन महाराष्ट्र और राजस्थान में किया जा चुका है और अब यह आयोजन उत्तर प्रदेश के झांसी में होने जा रहा है। इस आयोजन में बड़ी संख्या में एक साथ जैन संतों का मंगलमिलन होगा। करगुवां में प्रवासरत जैन संत आचार्य विनम्र सागर जी महाराज ने लगभग 12 दिनों तक चलने वाले इस विशाल आयोजन की जानकारी पत्रकारों को दी और कहा कि एक साथ इतनी बड़ी संख्या में जैन संतों के मंगल मिलन से वैचारिक मंथन होगा और समाज को एक नई दिशा मिलेगी।

आचार्य विनम्र सागर जी ने बताया कि गणाचार्य विरागसागर जी महाराज के सानिध्य में 14 मई को सभी संघों के संत मिलन समारोह की शुरूआत रानीमहल से निकलने वाली शोभायात्रा से होगी। करगुवां जी में भूमि शुद्धिकरण, ध्वजारोहण, पाद-पक्षालन, इंद्रो का सम्मान, भक्ति संध्या एवं मेंहदी कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। 15 मई को जैन धर्म के 23वें तीर्थकर भगवान पाश्र्वनाथ का महाशक्ति धारा से अभिषेक, महामंडल विधान, शास्त्र सभा, 16 मई को जाप्यानुष्ठान, सकलीकरण, समवसरण महामंडल विधान, सांस्कृतिक कार्यक्रम, 17 मई को राष्ट्रीय रजत विराग वर्धिनी प्रतियोगिता के विजाताओं को पुरस्कार वितरण, शास्त्र सभा, 18 मई को भक्तिमय महाआरती, 19 मई को शास्त्र विमोचन, बड़ी जयमाला, प्रतिभा सम्मान, चक्रवर्ती की दिग्विजय यात्रा, मंच से नाटकीय कार्यक्रम, 20 मई को प्रवचन व कवि सम्मेलन, 21 मई को राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी, रत्नवर्धिनी टीका विमोचन, विशिष्ट संपादक एवं पत्रकार सम्मेलन, 22 मई को विद्वत संगोष्ठी, 23 मई को महिला सम्मेलन एवं 24 मई को युवा सम्मेलन तथा युग प्रतिक्रमण होगा।

इसके अलावा प्रतिदिन संतों के प्रवचन भी होंगे। 25 मई को महाशांति धारा नित्यार्चन, श्रीजी की शोभायात्रा एवं सम्मान समारोह के साथ कार्यक्रम का समापन होगा। विधानाचार्य की जिम्मेदारी धरियाबाद के हंसमुख शास्त्री एवं भागचंद शास्त्री, टीकमगढ़ के जय निशांत एवं विमल कुमार सौरया, डीमापुर के महेश शास्त्री, कमल कुमार कमलांकुर को सौंपी गई है।

आचार्य विनम्र सागर जी महाराज ने बताया कि जैन संतों के  इस महाकुंभ में गणाचार्य विराग सागर जी, आचार्य विशुद्ध सागर जी, विभव सागर जी, विमर्श सागर जी, विनिश्चय सागर जी, संयम सागर जी, मुनि विलोचन सागर जी, विशोक सागर जी, विदृश्य सागर जी, विरत्न सागर जी, विश्रुत सागर जी, सुप्रभ सागर जी, विास सागर जी, आचरण सागर जी, संस्कार सागर जी, विभंजन सागर जी, विश्रांत सागर जी, विनाथ सागर जी, अध्यन सागर जी, विरंजन सागर जी, आर्यिका विशाश्री माताजी, विभाश्री माताजी, विज्ञाश्री माताजी, विदुषीश्री माताजी, विवोधश्री माताजी, विविक्तश्री माताजी, विशाखाश्री माताजी, विकाम्याश्री माताजी, विचक्षणाश्री माताजी, अर्हमश्री माताजी, ओमश्री माताजी एवं क्षुल्लक विदेह सागर जी महाराज के शामिल होने की संभावना है।

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