दिल्ली, राजस्थान , मध्यप्रदेश, बिहार-झारखण्ड, उत्तर प्रदेश, आदि प्रांतो से भारी संख्या में मंदारगिरी पहुँचे जैन धर्मावलंबी।

बौंसी (बाँका) बिहार।  जैन धर्म के 12 वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य स्वामी के महापरिनिर्वाण महामहोत्सव पर जैन अनुयायियों ने मंदारगिरी में भव्य शोभायात्रा निकाली। शोभायात्रा श्री दिगम्बर जैन मंदिर से हनुमान चौक , बौंसी बाजार , मारवाड़ी गली , गांधी चौक , वासुपूज्य द्वार , बारामती मंदिर होते हुए पापहरणी तलहटी स्थित यात्री सुविधा केंद्र जैन मंदिर तक गई। शोभायात्रा के पहले बौंसी स्थित कार्यालय जैन मंदिर में प्रातः अभिषेक , शांतिधारा , पूजन किया गया। इसके तत्पश्चात भगवान वासुपूज्य स्वामी के प्रतिमा को सजे-धजे भव्य रथ पर विराजमान कर भव्य शोभायात्रा के साथ रथयात्रा मंदार पर्वत के लिए प्रस्थान हुई।

रथ को रंग-विरंगे फूल-माला, बैलून,  पंचरंगा जैन ध्वज आदि से सुसज्जित भव्य तरीके से  सजाया गया था,  जो बहुत ही आकर्षक लग रहा था, और लोगो को आकर्षित कर रहा था, जिसे देखने लोगो की हुजूम उमड़ पड़ी।

इस भव्य शोभायात्रा में देश के कोने-कोने से सैंकड़ो की संख्या में जैन अनुयायी पहुंचे।

रथ पर विराजमान भगवान वासुपूज्य की मनोहारी प्रतिमा श्रद्धालुओं को और भी आकर्षित कर रही थी, सभी की निगाहे सजे-धजे आकर्षित रथ पर थी।

जैन श्रद्धालु हर्षोल्लासपूर्वक झूमते – नाचते , भजन-कीर्तन, महामन्त्र णमोकार का जाप करते हुए चल रहे थे ।

जगह – जगह की गयी रथ पर विराजमान भगवान वासुपूज्य की मंगल आरती।

शोभायात्रा के आगे-आगे जैन पंचरंगा ध्वज , झंडा- पताका लिए श्रद्धालु जैन संदेश देते चल रहे थे।

गाजे-बाजे , घंटी के मधुर धुन पर श्रद्धालु नृत्य करते रथयात्रा की शोभा बढ़ा रहे थे, इस ऐतिहासिक महामहोत्सव को लेकर जैन समाज के बीच खासा उत्साह था।

जब से जैन श्रद्धालुओं को मालूम हुआ कि जैन संत के सान्निध्य में यह निर्वाणोत्सव का आयोजन होगा तभी से सभी के बीच हर्ष का माहौल था और जैन समाज के लोग इस महोत्सव को सफल बनाने में जुटे हुए थे।

शोभायात्रा के नगर भ्रमण के दौरान हवन के माध्यम से वातावरण शुद्ध हुआ, जिसमे श्रद्धालु अग्नि में धुप – चन्दन खेव कर वातावरण सुगन्धित किया।

मंदार पर्वत शिखर स्थित मोक्ष कल्याणक स्थली पर चढ़ाया गया भव्य निर्वाण लाडू।

भगवान वासुपूज्य के तप, ज्ञान एवं पावन निर्वाण भूमि से सुशोभित मंदारगिरी पर्वत शिखर स्थित मोक्ष कल्याणक मंदिर में प्रभु के अत्यन्त प्राचीन चरण पादुका के समक्ष एवं भगवान वासुपूज्य खड्गासन मंदिर में 12-12 किलो का भव्य निर्वाण लाडू चढ़ाया गया , निर्वाण लाडू आकर्षक ढंग़ से शुद्धिपूर्वक तैयार किया गया था।

निर्वाणोत्सव का भव्य आयोजन जैन मुनि श्री विप्रण सागर जी महाराज के मंगल सान्निध्य में संम्पन्न हुआ।

आयोजित कार्यक्रम में भक्तो को जैन संत मुनि श्री 108 विप्रण सागर जी महाराज का मंगल सान्निध्य प्राप्त हुआ।

महाराज श्री के सान्निध्य में ही अभिषेक ,महामस्तकाभिषेक, शांतिधारा , पूजन आदि का कार्यक्रम सम्पन्न किया गया।

भगवान वासुपूज्य के समक्ष श्रद्धालुओं ने भव्य निर्वाण लाडू चढ़ाया।

इसके उपरांत जैन मुनि श्री विप्रण सागर जी महाराज के श्री मुख से मंगल प्रवचन हुआ और मौजूद श्रद्धालुओं के साथ- साथ पारस टीवी के सीधा प्रसारण के माध्यम से विश्वभर के श्रद्धालु लाभान्वित हुए और निर्वाण भूमि का दर्शन कर तीर्थयात्रिओं ने जीवन को धन्य किया।

संगीतकार ने अपने मधुर आवाज़ों में श्रद्धालुओं को खूब झुमाया, संगीतमयी वातावरण में श्रद्धालु पूजा-पाठ , भक्ति-आराधना में लगे थे।

उत्तम ब्रह्मचर्य के साथ महापर्व दसलक्षण धर्म पूजा सम्पन्न।

इस बाबत क्षेत्र प्रबंधक पवन कुमार जैन ने बताया कि उत्तम ब्रह्मचर्य हमें सिखाता है कि परिग्रहों का त्याग करना जो हमारे भौतिक संपर्क से जुड़ी हुई है , अर्थात सादगी से जीवन व्यतित करना सीखता है। कहा गया है कि उत्तम ब्रह्मचर्य का पालन करने से मनुष्य को पुरे ब्रह्माण्ड का ज्ञान और शक्ति प्राप्त होती है।

बताया गया कि सिद्ध भूमि मंदारगिरी से जैनियों का बहुत ही आस्था है , हर जैन धर्मावलम्बी अपने जीवन में एक बार यहां आना जरूर आना चाहता है।

वहीं जानकारी देते हुए निर्वाणोत्सव मीडिया प्रभारी प्रवीण जैन ने बताया कि इस वर्ष का भगवान वासुपूज्य निर्वाण महोत्सव ऐतिहासिक और भव्य रहा, आयोजन कई वर्षो पूर्व से मनाया जाते आ रहा है पर शायद यह पहली बार होगा कि किसी जैन संत ससंघ का मंगल सान्निध्य प्राप्त हुआ।

इस भव्य आयोजन को लेकर स्थानीय क्षेत्र प्रबंधक पवन कुमार जैन , उप्रबंधक राकेश जैन आदि समिति के लोग विशेष रूप से दिन-रात लगे हुए थे।

इस महामहोत्सव को सफल बनाने में आयोजक श्री बिहार स्टेट दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र कमिटी और आयोजन सहयोगी  श्री वर्षायोग सेवा समिति भागलपुर – नाथनगर जोर-शोर के साथ व्यवस्था में लगा हुआ था।

बता दे कि भगवान वासुपूज्य निर्वाणोत्सव को लेकर श्री दिगम्बर जैन मंदिर को आकर्षक ढंग से रंगीन – बल्बो से सजाया गया है जो काफी आकर्षित लग रहा है। पुरा मंदिर परिसर रंग-विरंगे लाइटओं से जग-मग कर रहा है।

विदित हो कि जैनियो के चल रहे दसदिवसिय महापर्व पर्युषण का समापन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के साथ किया गया , इस दौरान जैन धर्म के कई अनुष्ठानो से मंदार क्षेत्र का वातावरण पवित्र हुआ और जैन धर्मावलंबियो में विश्वशांति के लिए प्रतिदिन मंगल भावना सहित विशेष पूजन  कर रहे थे।

इस अवसर पर क्षेत्र प्रबंधक पवन कुमार जैन के नेवतृत्व में राकेश जैन ,विपिन जैन , प्रवीण जैन , संजीत जैन , पंकज जैन , सोमेश जैन , शैलेश जैन , मनोज जैन , कमल जैन , सरोज कुमार जैन , अजित कुमार जैन , चंदा जैन ,शिल्पी जैन , सत्यम जैन , रवि जैन सहित काफी संख्या में जैन श्रद्धालु, दिल्ली, राजस्थान , मध्यप्रदेश, बिहार-झारखण्ड, उत्तर प्रदेश, आदि प्रांतो से भारी संख्या में पहुँचे जैन धर्मावलंबी के लोग उपस्थित हुए।

मंदारगिरी का होगा विकास : सम्पूर्ण जैन समाज को मुनि श्री विप्रण सागर जी महाराज का आह्वान

  • 1008 सीढ़ियाँ एवं रेलिंग का होगा निर्माण ।

भगवान वासुपूज्य निर्वाण महोत्सव के मंच से जैन संत मुनि श्री 108 विप्रण सागर जी महाराज ने मौजूद जैन समाज और पारस चैनल के सीधा प्रसारण के माध्यम से 122 देशों में देख रहे सम्पूर्ण समाजों से आह्वान किया है कि पावन पवित्र सिद्ध क्षेत्र भगवान वासुपूज्य स्वामी की तप , ज्ञान एवं निर्वाण भूमि मंदारगिरी का विकास व जीर्णोद्धार अवश्य होना चाहिए जिसमें आप सभी बढ़-चढ़ कर हिस्सा अवश्य लें।

ज्ञातव्य हो कि जैन धर्म के जितने भी तीर्थस्थल है उनमें मंदारगिरी का अहम स्थान है और काफी मनोरम स्थल भी है।लेकिन इतने महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल का विकास अधुरी है जहाँ देश-विदेश से सालोभर लाखों की संख्या में जैन तीर्थयात्री आते है , सभी के लिए यह स्थान आस्था का केंद्र है।

फिर भी मंदारगिरी पर्वत पर सीढ़ियाँ एवं रेलिंग का निर्माण आधे पर्वत (सीता कुंड) तक ही की गई है।

सीढ़ियाँ एवं रेलिंग का निर्माण मंदार पर्वत शिखर चोटी तक नही होने से अब जैन मुनि के आह्वान पर मंदारगिरी विकास में जैन समाज आगे आये है।

मंदार पर्वत चोटी तक जाने में तीर्थयात्रियों एवं जैन साधु-संतो को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। मंदारगिरी पर्वत शिखर स्थित जैन मंदिर तक सीढ़ियाँ एवं रेलिंग निर्माण की सख्त आवश्यकता है।

जैन मुनि के आह्वान पर काफी संख्या में जैन समाज के लोगों यह कार्य पूर्ण कराने का बीड़ा उठाया और स्वीकारता ली।

जहाँ तक संभव हो इस स्थल का विकास होना चाहिए।

संबोधित करते हुए विप्रण सागर जी महाराज ने कहा कि मंदारगिरी में भगवान वासुपूज्य स्वामी का 31 फुट ऊंची खड्गासन प्रतिमा स्थापित होना चाहिए , ताकि यहाँ आने वाले लोगों को तीर्थंकर वासुपूज्य की महिमा और उनके बारे में जान सकेंगे ।

जैन समाज को प्राचीन तीर्थ क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देना चाहिए और उसके विकास हर संभव सहयोग करना चाहिए ।

इसके साथ साथ भगवान वासुपूज्य स्वामी की दीक्षा एवं प्रथम आहार भूमि “बारामति मंदिर” सहित मंदारगिरी के अन्य स्थलों और योजनाओं के विकास की भी बातें कही।

–प्रवीण जैन  (पटना)

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