जैन संतों को खुले में शौच की छूट के लिए केंद्रीय मंत्री नायडू ने विभाग को लिखा पत्र

केन्द्रीय आवास एवं शहरी मंत्री वैंकया नायडू ने अपने विभाग को 28 दिसंबर 2016 को पत्र लिखकर जैन संतों को खुले में शौच की छूट देने के लिए कार्यवाही करने का पत्र लिखा है। श्री नायडू ने गुना-अशोकनगर के सांसद और पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के पत्र को स्वीकृति प्रदान करते हुए पत्र लिखा है।

सांसद सिंधिया ने परम्पराओं को ध्यान में रखते हुए केन्द्रीय मंत्री नायडू को पत्र लिखा था जिसमें कहा गया था कि पत्र के माध्यम से मांग की गई है कि जैन संतों और मुनियों को खुले में शौच से मुक्त रखा जाए। केन्द्रीय मंत्री नायडू ने पत्र का जवाब देते हुए जैन संतों को खुले में शौच की छूट देने संबंधी आवश्यक कार्यवाही हेतु शहरी एवं आवास मंत्रालय की अनुभाग को लिखा है।

जैन धर्म आचार प्रधान ग्रंथों में खुले में शौच का नियम

जैन धर्म के आचार प्रधान ग्रंथों के अनुरूप जैन श्रमण परंपरा के साधक के रूप में आचार्य, उपाध्याय, मुनि राज, आर्यिका महासती, साधवी, ऐलक, छुल्लक, छुल्लिका, व्रती, श्रावक, श्राविकाएं, मुमुक्ष, ब्रम्हचारी एवं ब्रम्हचारिणियां आदि अहिंसा व्रत के परिपालन हेतु खुले स्थान में शौच का परिपालन करते हैं। ‘मुलाचार’ के ‘मूल गुण’ अधिकार तथा पंचाचार्य में भी खुले में निर्देशित किया है।

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