प्राकृत दीक्षांत समारोह मुनिश्री प्रणम्य सागर के सानिध्य में संपन्न, प्राकृत भाषा की शिक्षा ले रहे है मेरठ के 600 बच्चे

मेरठ, प्राचीन परंपरा और अनूठी संस्कृति को समेटे देश की प्राचीन लिपि यानी प्राकृत भाषा केवल जैन धर्म की नहीं अपितु जन-जन की भाषा रही है। आज भी अंग्रेजी के कई शब्द प्राकृत भाषा से लिए गये हैं। मेरठ के डी-रोजिज होटल में आयोजित प्राकृत भाषा दीक्षांत समारोह के एक विशाल समारोह में बोलते हुए जैन मुनि प्रणम्य सागर जी ने उक्त विचार प्रकट किये। समारोह में मुनिश्री प्रणम्य ने प्राकृत को प्राचीन भाषा बताते हुए कहा कि कालिदास के नाटकों में प्राकृत जीवित है।

भाषा के हर्षचरित, कवि शूद्रक के मृच्छकटिकम में प्राकृत भाषा का प्रयोग है। चंद्रधर गुलेरी ने भी पुरानी हिदी यानी प्राकृत के शब्दों का इस्तेमाल किया। दिल्ली सरकार ने प्राकृत एकेडमी खोलने की घोषणा की है। रेवाड़ी के साथ देश के कोने-कोने में बच्चे प्राकृत भाषा सीख रहे हैं। वैकल्पिक विषय संस्कृत के साथ प्राकृत को भी जोड़ा जा सकता है। प्राचीन समय में प्राकृत को मध्य देश यानी आज के मथुरा के आसपास की भाषा बताया गया है। यानी उत्तर प्रदेश ही प्राकृत भाषा का जनक है।

समारोह में व्यवसायिक शिक्षा और कौशल विकास राज्य मंत्री कपिलदेव अग्रवाल ने प्राकृत भाषा का प्रशिक्षण देने वाले प्रशिक्षकों को सम्मानित किया। प्राकृत शिक्षा में पाइय सिक्खा पूरी करने वाले प्रतिभागियों को पदक और प्रमाणपत्र भी दिए गए। राजस्थान, हरियाणा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली से सैकड़ों की संख्या में लोग सम्मिलित हुए। कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल भी शरीक हुए। किशनगढ़ से आरके मार्बल, अशोक पाटनी, भाजपा के मीडिया प्रभारी आलोक सिसौदिया, सौरभ जैन, अंबिका अंबर, विनेश जैन, सुनील जैन, नेहा जैन, रंजीत जैन सहित काफी संख्या में जैन समाज के लोग उपस्थित रहे।

प्राकृत शिक्षा के भाग-1 और 2 की पढ़ाई कर परीक्षा देने वाले लगभग 200 प्रतिभागियों के रिजल्ट की घोषणा की गई। इसमें आनलाइन एवं आफलाइन दोनों प्रतिभागी सम्मिलित हुए। कुछ प्रतिभागियों को दीक्षा में र्सटििफकेट और मेडल दिए गए। अन्य के र्सटििफकेट रेवाड़ी में दिए जाएंगे। इस मौके पर सकल जैन समाज की ओर से राज्य मंत्री कपिलदेव अग्रवाल को पत्र भी सौंपा गया, जिसमें स्कूली शिक्षा में प्राकृत भाषा को वैकल्पिक भाषा के रूप में सम्मिलित कराने की मांग की गई। भाषा को नृत्य और गीत से जीवंत किया।

समारोह में रेवाड़ी से आए छोटे- छोटे बच्चों ने प्राकृत भाषा को लेकर नृत्य, गीत, नाटक प्रस्तुत किया। अपनी प्रस्तुति से उन्होंने प्राकृत को जीवंत कर दिया। बच्चों में प्राकृत बोलने और अभिनय करने की ललक दिखी। मेरठ में भी प्राकृत भाषा की पढ़ाई इस साल से ऋषभ एकेडमी ने कक्षा छह से अपने यहां शुरू किया है। छह सौ बच्चे इसकी शिक्षा ले रहे हैं। प्राकृत जैन विद्या पाठशाला समिति रेवाड़ी के अध्यक्ष डा. अजेश जैन ने बताया कि देश में 20 जगह प्राकृत पढ़ाई जा रही है। 10 जगह ऑनलाइन क्लास भी चल रही हैं। समारोह में पत्रिका प्राकृत शिक्षा भाग- 3, पागद संदेश और दशर्न की अनुभूति पुस्तिका का विमोचन किया गया। इसके साथ ही भजन की एक डिवाइस की गई।

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