नवागढ़ क्षेत्र में होगा पुरातत्व शिल्पों का संरक्षण : जय कुमार निशांत

नवागढ़, ललितपुर। प्रागैतिहासिक अतिशय क्षेत्र नवागढ़ जिला ललितपुर में राष्ट्रीय सांस्कृतिक संपदा संरक्षण अनुसंधान शाला लखनऊ के महानिदेशक के निर्देशन में डॉक्टर PK पांडे वरिष्ठ अधिकारी के द्वारा तीर्थ क्षेत्र के ऐतिहासिक तथ्यों का अनुसंधान किया शुरू हो गया है।
तीर्थ क्षेत्र नवागढ़ के निदेशक, देश के प्रख्यात प्रतिष्ठाचार्य ब्र. जय कुमार निशांत और मीडिया प्रभारी डॉ सुनील संचय ने प्रेस विज्ञप्ति में जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रीय सांस्कृतिक संपदा संरक्षण अनुसंधान शाला लखनऊ के डायरेक्टर वी वी करवटें के निर्देशन में दो संरक्षण अधिकारी एवं 15 प्रशिक्षणार्थी नवागढ़ क्षेत्र के प्राचीन शिल्प का संरक्षण रासायनिक प्रक्रिया द्वारा करेंगे। इस प्रकार नवागढ़ में संरक्षित हजारों साल प्राचीन शिल्प को नवीन जीवनदान मिलेगा। ज्ञातव्य है नवागढ़ में प्रतिहार काल सन 825 से लेकर 2000 वर्ष प्राचीन मिट्टी के मनके तथा पाषाण के मनके 8000 वर्ष प्राचीन शैल चित्र जैन धर्म की ऐतिहासिकता को प्रदर्शित कर रहे हैं । नवागढ़ के फाइट ऑन पहाड़ी में स्थित गुफाओं में अंकित कायोत्सर्ग मुद्रा एवं चरण नवागढ़ में जैन संतों की प्राचीन परंपरा के विलक्षण साक्ष्य हैं ।लखनऊ की अनुसंधान कार्यदल द्वारा अन्वेषण किया जाएगा जिससे जैन संस्कृति के साथ ही भारतीय इतिहास और पुरातत्व के क्षेत्र में विशेष आयाम उद्घाटित होंगे।
15 दिवसीय इस अनुसन्धान शाला का विधिवत उदघाटन किया गया, जिसमें क्षेत्र के मूलनायक भगवान अरनाथ स्वामी का आशीर्वाद सभी ने मंगल आरती करके लिया। ब्रह्मचारी जयकुमार निशांत ने सभी को क्षेत्र की ऐतिहासिकता, सांस्कृतिक महत्व क्षेत्र के अन्वेषण एवं अतिशय की जानकारी देते हुए जैन धर्म की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। क्षेत्र के मंत्री सनत कुमार एडवोकेट ने सभी का आभार माना । सुरेंद्र जैन, सोमचंद, सुमन, मेघवाल, राकेश जैन, सनत जैन बड़ागांव , डॉ सुनील संचय, संजय जैन टीकमगढ़ एवं क्षेत्र मैनेजर चंद्रभान ने सभी का स्वागत अभिनंदन किया। संघर्ष की सर्वश्रेष्ठ कृति तीर्थंकर युक्त महामंडल तोरण एवं उपाध्याय परमेष्ठी की मूर्ति से कार्य का शुभारंभ किया। अनुसंधानशाला में अरुणाचल प्रदेश, उड़ीसा, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों के एन आर एल सी परीक्षार्थी अनुसंधान शाला में भाग ले रहे हैं। ये सभी 25 दिसंबर तक नवागढ़ में रहकर कार्य संपादित करेंगे। इस अवसर पर तीर्थ क्षेत्र कमेटी नवागढ़ द्वारा सभी का सम्मान किया गया।
नवागढ़ में प्राप्त पुरा अवशेषों का समय-समय पर अनेक पुरातत्वविदों, इतिहासकारों ने निरीक्षण और अनुसंधान कर अनेक ऐतिहासिक तथ्य उदघाटित किये हैं। इस 15 दिवसीय अनुसन्धान शाला में भी अनेक तथ्य सामने आयेंगे जो भारतीय पुरा वैभव की दृष्टि से मील का पत्थर सावित होगें।

फलित हुआ गुरुवर का आशीष
नवागढ़ अतिशय क्षेत्र के पदाधिकारियों ने ग्राम टडा मैं आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी का आशीर्वाद प्राप्त किया था उनके आशीर्वाद से लखनऊ अनुसंधानशाला से संपर्क स्थापित किया गया। आचार्यश्री के जेष्ठ शिष्य मुनि श्री समयसागर जी के नवागढ़ प्रवास के दिन लखनऊ अनुसंधान की स्वीकृति प्राप्त हो गई तथा गुरुवर के आशीर्वाद से 10 दिसंबर से 25 दिसंबर तक अनुसंधानशाला की 17 सदस्यीय टीम द्वारा नवागढ़ में स्थित प्राचीन शिल्पों का रासायनिक संरक्षण आरंभ होने जा रहा है। उल्लेखनीय है कि इस प्रागेतिहासिक तीर्थ क्षेत्र को देश के जाने -माने प्रतिष्ठाचार्य रहे गुलाब चंद जी पुष्प प्रकाश में लाये थे, आज दिनों-दिन यह अति प्राचीन तीर्थ क्षेत्र जय निशांत भैयाजी के निर्देशन में विकास की नूतन गाथा गढ़ रहा है।
पहुँच मार्ग
जनपद के महरौनी विकासखंड में स्थित है।महरौनी से सोजना होकर 25 किमी तथा सागर-टीकमगढ़ बस मार्ग पर स्थित बड़ागांव क्षेत्र से 8 किमी दूरी पर स्थित सुरम्य प्राकृतिक सौंदर्य युक्त अतिशय क्षेत्र नवागढ़ स्थित है। ललितपुर से 65 किमी दूरी है।

• डॉ सुनील जैन संचय

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