म.प्र. विधानसभा में लगी आचार्यश्री की धर्मसभा

जय जिनेन्द्र । जिस विधानसभा मैं रोज तीखी बहस और नोकझोंक होती थी एक दुसरे पर प्रश्न प्रतिप्रश्न किए जाते थे भारी शोर शराबा होता था आज बाह शांति के साथ मुख्यमंत्री , बिधायकगंन , अधिकारीगण सभी देश के चलते फिरते भगवान को सुनने बैठे थे । दीप प्रज्ववलं श्री शिवराज जी ,श्री सीताशरण जी ने किया और श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया । वित्त मंत्री जयंत मलैय्या बाला बच्चन राजेन्द्रसिंह जी ने आशीर्वाद लिया । मंगलाचरण डॉ सुधा मलैया जी ने किया । विधानसभा अध्य्क्ष जी ने कहा की श्रद्धावान और ज्ञान के पुंज विधान भवन मैं पधारे हैं उनका आत्मीय अभिनन्दन है । इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री शिवराज जी ने कहा क़ि आज सबका सोभाग्य है की एक विधानसभा हमारे मंत्री मंडल की है और एक कैबिनेट आचार्य श्री के मुनिराजों की है जो भव्य है । आप के दर्शन को आज पक्ष विपक्ष एक साथ बैठा है ये सबसे प्रसन्नता की बात है । उन्होंने कहा की अपने आप हम बदल सकते हैं यदि आप जैंसे सर्वस्व त्यागी के बताये रस्ते का अंनुसारण करें । आत्मा को दीपक तभी बनाया जा सकता है जब आप जैंसे तपस्वी की वाणी को आत्मसात करें ।।

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             इस अवसर पर पूज्य आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज ने कहा की पथिक पथ पर चलता यदि पैर मैं कांटा लग जाये तो दुसरे पैर से काम चला लेता है  एक आँख क्षति ग्रस्त हो भी जाय तो दुसरी आँख से काम चला लेता है । सदन पक्ष विपक्ष दोनों के संयुक्त प्रयासों से चलता है । राट्रीय पक्ष को सामने रखकर ही काम मिलजुल कर किया जाये जनता का दुःख तभी दूर हो सकता है । उन्होंने राष्ट्रीय पक्ष को सामने रखकर काम करने की प्रेरणा देते हुए कहा की जहां हम हैं ये मध्यभारत है जो चारों दिशाओं का केंद्र बिंदु है यहीं से देश की चारों दिशाएं प्रभावित होती हैं । संस्कारों से बंधकर कार्य करेंगे तो अपनी संस्कृति को अपने भारत को मजबूत भारत बना पाएंगे । अहिंसा की संस्कृति से ही इस भारत राष्ट्र को जाना जाता है । भेद विज्ञानं को टाक मैं रखकर भौतिकता के विज्ञानं मैं घुसकर अपनी संस्कृति को लहूलुहान बना लेते हैं । पूरी दुनिया भारतीय संस्कृति पर चलने का प्रयास कर रही है । ये विधान भवन अहिंसा का केंद्र बिंदु है ये एक पवित्र सदन है जहाँ पक्ष विपक्ष को छोड़कर राष्टीय पक्ष के बारे मैं विचार करना है । राजा यदि परमार्थ की खोज मैं निकलेगा तो प्रजा का कल्याण अवश्य होगा ।।

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   गुरुवर ने कहा की जिस तरह किसान बीज को अपने पुरुषार्थ से अंकुरित बना देता उसकी नीचे की यात्रा प्रारम्भ होती है जड़ मजबूत होती है फिर वो एक विशाल वृक्ष का रूप लेता है । भारत की अहिंसा की संस्कृति के लिए जो शहीद हुए हैं उसके शहीद स्मारक के बारे मैं गुरूजी ने कहा की ये स्मारक देश के प्रत्येक वर्ग को अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए प्रेरित करता है । उन्होंने कहा की देश मैं जो दूध का उत्पादन हो रहा है उसमें और बृद्धि होनी चाहिए । महावीर ने कहा की संग्रह तो होना चाहिए परिग्रह नहीं होना चाहिए । आज जनप्रतिनिधियों को इस बात पर ध्यान देना चाहिए की आप जनता के लिए काम करें पद का अभिमान न करें ,आप सेवा के लिए चुने गए हैं ।।

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आचार्य श्री ने कहा की यदि विकास चाहिए समृद्धि चाहिए तो इंडिया को विस्मरत कर भारत को पूरी ताकत से खड़ा करना होगा । मूल संस्कृति भारत का वैभव तभी अमर रह सकता है जब जन जन मैं भारतीयता , राष्ट्रवाद की भाबना को प्रबल करना होगा । उन्होंने कहा की मध्यप्रदेश सरकार ने हिंदी की मजबूती के लिए जो अटलजी के नाम पर विश्वविद्यालय बनाया है सराहनीय कार्य है । अन्य क्षेत्रों मैं भी राष्ट्रभाषा को मजबूत बनाने का काम होना चाहिए । अंग्रेजी को भाषा के रूप मैं पढ़ना चाहिए माध्यम के रूप मैं हिंदी ही होना चाहिए । भारत कृषि प्रधान देश है आज एक एकड़ मैं 36 बोरी अनाज होता है प्राचीन समय मैं 56 बोरी होते थे । कारण जानकर व्यवस्था ठीक करनी चाहिए । अनुसन्धान मैं भारत सबसे आगे था आज विदेशों मैं अनुसंधान हो रहे हैं । पुनः संभिधान के इस बिधान भबन मैं सब मिलकर कार्य करें लोकतंत्र को मजबूत करें एहि आशीर्वाद है  ।।

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इसके पूर्व आचार्यसंघ की भव्य अगवानी मुख्यद्वार पर विधानसभा अध्य्क्ष , मुख्यमंत्री जी मंत्रीगणों और विधायकों ने की । फिर विधान भवन का अवलोकन गुरुवर को कराया । इस अवसर पर चातुर्मास समिति के अध्य्क्ष प्रमोद हिमांशु भी उनके साथ थे । संघस्थ ब्रह्मचारी विनय भैया भी साथ थे । इस अवसर पर आचार्य श्री ने विधानसभा के वाचनालय का निरिक्षण भी किया । इस अवसर पर चातुर्मास समिति के सुनील 501  मनोज जैन म mk  राजेश कोयला देवेन्द्र रूचि विनोद mpt  नरेंद्र वंदना नितिन नंदगाओंकार सहित 2000 लोग उपस्थित थे ।

लेखक  पंकज प्रधान। प्रस्तुति। अभिनव कासलीवाल। मनोज मन्नू। प्रभारी  सोशल मिडिया।  चातुर्मास समिति।

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