आचार्य श्री विपुल सागर जी महाराज का 45 वां दीक्षा दिवस, आरा में 30 को निकाली जाएगी शोभायात्रा।


आरा/पटना : जैन समुदाय के प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती श्री 108 शांति सागर जी महाराज परम्परा के आचार्य श्री 108 धर्म सागर जी महाराज के शिष्य पट्टाचार्य परम पूज्य वयोवृद्ध श्री 108 विपुल सागर जी महाराज का 45 वां संयम दीक्षा दिवस धर्मनगरी आरा (बिहार) स्थित श्री चन्द्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर में 30 जनवरी को धूमधाम से मनाया जाएगा।

इस अवसर पर गुरुवार को श्री दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर से श्री जी को सुसज्जित रथ पर विराजमान कर नगर भ्रमण कर श्री चन्द्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर तक भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसके पश्चात श्री चन्द्रप्रभु जैन मंदिर में जिनेन्द्र प्रभु का पंचामृत अभिषेक, शांतिधारा व विशेष पूजन-अर्चना की जाएगी। साथ ही गुरुदेव आचार्य श्री विपुल सागर जी महाराज के स्वर्णिम 45 वां संयम दीक्षा दिवस पर गुरुदेव का पाद  प्रक्षालन , शास्त्र भेंट , गुरु पूजन आदि विशेष धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन भी किया जाएगा।

आचार्य श्री भद्रबाहु सागर जी महाराज ने बताया कि जब किसी श्रावक में जैन साधु-साध्वी बनने की ललक हो तो वह पहले दीक्षार्थी धर्म का पालन करता है। घर-परिवार , धन-दौलत , मोह-माया , सांसारिक सुखों का त्याग कर कठोर तप-साधना में लीन हो जाता है। जब दीक्षार्थी के गुरु को लगता है यह श्रावक दीक्षा लेने योग्य है तब जाकर उसे दीक्षा प्रदान की जाती है। दीक्षा के पश्चात वह दीक्षार्थी एक संत बन जाता है और जिनशासन धर्म प्रभावना में अपना जीवन समर्पित कर देता है।

मुनि श्री 108 भरतेश सागर जी महाराज ने बताया कि हमने तो अपने दीक्षा गुरु का दीक्षा नही देखा पर आज उनके दीक्षा दिवस पर उनके कठिन त्याग , तपस्या और साधना को नमन करता हूं। जिन्होंने मुझे अपना शिष्य बनाया मैं धन्य हूं कि ऐसे महासंत की छाया में धर्म ज्ञान ग्रहण कर रहा हूं। गुरुदेव का हम शिष्यों पर जो उपकार, वात्सल्य मिलता है उसे पाकर हर शिष्य धन्य हो जाता है।

 

— प्रवीण जैन (पटना)


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