अक्षय तृतीया पर इच्छु रस का किया गया वितरण

बड़ौत/खेकड़ा, जैन धर्म में अक्षय तृतीया का दिन अति महत्वपूर्ण है। जैन धर्म के पहले तीर्थकर भगवान ऋषभदेव ने मौन व्रत धारण कर बिना कुछ खाये-पिये घने जंगलों में कठोर तपस्या में लीन हो गये।  11 माह 13 दिन के कठिन तप के बाद ऋषभदेव ने अक्षय तृतीया के दिन पहली बार राजा श्रेयांस द्वारा  दिया गया  इच्छु रस (गन्ने का रस) ग्रहण किया था। इसलिए जैन धर्म में अक्षय तृतीया का विशेष महत्व है। इस मौके पर बड़ौत के श्री पाश्र्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर परिसर में जैन मिलन महिला चेतना द्वारा गन्ने का रस वितरण किया गया। जैन मिलन की अध्यक्षा पूनम जैन ने बताया कि अक्षय तृतीया के दिन जैन समुदाय के लोग दान करते हैं और गन्ने का रस वितरण करते हैं। इस अवसर पर मंत्री अनीता जैन, कुसुम जैन, सुषमा जैन, उर्मिला जैन, निधि जैन, सुमन जैन, ऋतु जैन आदि उपस्थित थे। इसी तरह एसएस जैन महिला संघ बड़ौत द्वारा भी गन्ने का रस बांटा गया तत्पश्चात भगवान महावीर मार्ग, गांधी चौक, लोहिया बाजार और अन्य स्थानों  पर भी जैन अनुयायियों ने भी गन्ने का रस वितरित किया।  खेकड़ा में भी महिला जैन ज्योति के द्वारा अक्षय तृतीया पर भगवान महावीर दिगम्बर जैन मंदिर से गन्ने का रस वितरण किया गया। इस दौरान नगर में जैन कालेज मार्ग स्थित भगवान महावीर दिगम्बर जैन मंदिर में जैन ज्योति मिलन के पदाधिकारियों ने गन्ने के रस की प्याऊ लगाकर लोगों को जी-भरकर रस पिलाया। सभी ने गन्ने के रस को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया। इस मौके पर खेकड़ा जैन ज्योति मिलन की अध्यक्षा बीना जैन, मंत्री रीना जैन, नीतू जैन, मंजू जैन, वीरेंद्र जैन, सतीश जैन, अशोक जैन, राजेश जैन, पंडित सुशील जैन आदि मौजूद थे।

Comments

comments