मंदारगिरी के क्षेत्र मे मिली गुप्त व पाल कालीन जैन तीर्थंकर की मूर्ति।

मंदार क्षेत्र तो पुरातात्विक अस्तित्वो की भंडार तो है ही साथ ही साथ एक बार फिर यहाँ जैन धर्म के 17 वे तीर्थंकर कुंथुनाथ भगवान की मूर्ति मिली है। मूर्ति 74 सेमी ऊँची,43 सेमीफाइनल चौड़ी एवं 12 सेमी मोटी है।

      पुरातत्व विभाग की टीम ने खोज निकाली है जैन तीर्थंकर की मूर्ति

बेसाल्ट पत्थर की बनी है मूर्ति।पुरातत्व विभाग की टीम का कहना है कि ये बेशकीमती मूर्ति भागलपुर व बांका में मिली अन्य मूर्तियो से कई मायनों मे अलग और खास है।

                बताई जा रही है कि यह मूर्ति की बनावट गुप्त काल से पूर्व की है। बताया जा रहा है कि यह मूर्ति अनुमान से अधिक प्राचीन हो सकती है।साथ मे एक वेदी भी मिली है संभवत: इसका उपयोग योग व साधना में किया जाता होगा।

साथ ही साथ बौद्ध धर्म के अभल लतेकेश्वर स्वरूप की मूर्ति मिली है। यह मूर्ति बांका जिले के बाराहाट के खड़हरा गांव मे मिली है पुरातत्व विभाग की टीम का कहना है कि यह क्षेत्र जैन और बौद्ध धर्म से जुड़ा होगा।

      साथ ही साथ मंदार की पावन भूमि पर  कुंथुनाथ भगवान की मूर्ति भी मिली है।इससे साफ पता चलता है कि मंदार तीन धर्मों का संगम स्थल तो है ही और पूर्व मे भी रहा होगा। इस क्षेत्र मे जैनो का अस्तित्व पता नही कितने वर्षों से चला आ रहा होगा। इससे यह ज्ञात होता है कि मंदार क्षेत्र मे खोज करने पर और भी जैनो का अस्तित्व मिल सकता है।

ग्रामीण इन मूर्तियो को ग्रामदेवता के रूप मे पूजते आ रहे है।

 

  • Pravin Jain

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