जैन परिवार ने शादी के खर्चे से बनवाया 90 गरीब परिवारों के लिए घर

शादी खुशियों का समागम है, जिसमें दो लोग ही नहीं दो खानदान एक हो जाते हैं. हिंदी सिनेमा ने शादी के भव्यता को बेजोड़ तरीके से फिल्माया है. इसी तरह समाज में भी शाही शादियों के किस्से हर जुबान पर हैं. लेकिन फिल्मी पर्दे के बाहर महाराष्ट्र के औरंगाबाद में हुई जिस शादी के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं वह किसी फिल्म की कहानी तो नहीं है लेकिन उससे कम भी नहीं है.

औरंगाबाद के दो परिवारों ने शादी में फिजुलखर्ची ना करने का फैसला करते हुए उन पैसों से 90 गरीब परिवारों के लिए घर बनावा दिया. इतना ही नहीं जरुतमंद लोगों के लिए बनाए गए घरों के बीच में ही मंडप लगाकर 12 दिसंबर को शादी की गई.

जिला औरंगाबाद के जाने-माने व्यवसायी अजय कुमार मुनोत की बेटी श्रेया की शादी उसी जिले के मशहूर व्यापारी मनोज कुमार जैन के बेटे बादल के साथ तय हुई थी. दोनों परिवार आर्थिक रूप से संपन्न थे, इसलिए शादी को भव्य तरीके से आयोजित करने की तैयारी थी. जिसके चलते फाइव स्टार होटल से लेकर गाने बजाने की बुकिंग शुरू कर दी गई थी.

इसी दौरान अजय और मनोज ने फिजूलखर्ची नहीं करने का फैसला किया और सोचा क्यों ना इन पैसों से गरीब लोगों की मदद की जाए. इस विचार को लेकर उन्होंने इलाके के विधायक प्रशांत बंब से इस पर चर्चा की. विधायक से चर्चा करने और सोच विचार करने के बाद यह फैसला लिया गया कि फाइव स्टार, कैटरिंग और गाने-बजाने की तैयारी में किए जाने वाले लाखों के खर्चे को बचाकर गरीब लोगों के लिए घर बनाया जाए.

दोनों परिवारों ने तय किया कि इस तरह की शादी हमारे जिंदगी का अविस्मरणीय क्षण होगा. यह सब अक्टूबर में तय हुआ और शादी दिसंबर में होने वाली थी. अजय और मनोज के पास सिर्फ दो महीनों का वक्त था ऐसे में वे थोड़े चिंतित हुए लेकिन विधायक प्रशांत ने घर बनावाने की जिम्मेदारी ली.

विधायक से तसल्ली मिलने के बाद गरीबों के लिए घर बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई. लासूर स्टेशन से 5-6 किलोमीटर दूरी पर मौजूद तारापुर में घर बनाने की तैयारी शुरू हुई. विधायक ने ऐसे लोगों की सूची बनाई जिन्हें घर की जरूरत थी. इसके लिए एक सर्वे भी किया गया, जिसमें इस बात का ध्यान रखा गया कि जिन्हें घर दिया जाएगा वो जरूरतमंद हैं या नहीं.

केवल 50 दिनों के भीतर 90 घर बनाकर तैयार कर दिए गए और उन घरों के बीच में पंडाल लगाकर 12 दिसंबर को शादी की गई.

साथ ही शादी के दौरान ही 90 परिवारों को घर की चाबियां दी गईं. शादी में बेवजह के खर्चों को बचाकर अजय मुनोत और जैन परिवारों ने जिस तरह से गरीब लोगों की मदद की हैं, यह एक मिसाल है. दोनों परिवार ने कहा कि जो लोग आर्थिक संपन्न हैं उन्हें आगे आना चाहिए और गरीब-बेघर लोगों की मदद करनी चाहिए.

साभार : abpnews

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