उपाध्याय उर्जयन्तसागर जी इंदौर पहुँचे, बीसपंथी मंदिर मल्हारगंज में होगा चातुर्मास

इंदौर। वात्सल्य रत्नाकर आचार्य श्री विमल सागर जी महाराज के अंतिम दिक्षित शिष्य उपाध्याय श्री उर्जयन्त सागर जी महाराज बावनगजा से पद विहार कर इंदौर पहुंच गए है।मल्हारगंज स्थित श्री दिगंबर जैन बीसपंथी मंदिर में आपका चातुर्मास संपन्न होगा। मंदिर व्यवस्था कमेटी महिला मंडल एवं समाज जनों ने उपाध्याय श्री की अगवानी पाद प्रक्षालन कर की । उल्लेखनीय है कि उपाध्याय श्री श्रवणबेलगोला महा मस्तकाभिषेक के उपरांत पद विहार करते हुए बावन गजा पहुंचे थे ।  लॉकडाउन की संपूर्ण अवधि सिद्ध क्षेत्र बावन गजा में पूर्ण करते हुए पावागिरी ऊन की यात्रा करते हुए 24 जून की सुबह इंदौर मल्हारगंज में प्रवेश किया।

निज में रमण करना ही जैन दर्शन की साधना पूजा

उपाध्याय श्री ने कोरोना संकट के दौरान सभी श्रद्धालुओं को सोशल डिस्टेंसिंग व शासन के निर्देशों का पूर्ण पालन करने की सलाह देते हुए कहा की निज में निज का दर्शन करना ही जैन दर्शन का मूल सिद्धांत है , हमारी सारी साधना निज के दर्शन के लिए होती है, इसलिए घर पर रहकर ही साधना करें । अपने आप को सुरक्षित रखें और हमेशा भगवान का चिंतन करते हुए अपनी आत्मा यानि निज  का दर्शन करने का प्रयास करें सभी को आशीर्वाद है की इस संकट से हम सबको शीघ्र छुटकारा मिले । सभी प्रतिदिन णमोकार मंत्र की माला और स्वाध्याय करने की आदत बना ले , मुंह पर मार्क्स बांधकर ही घर से निकलें, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें , याद रखे शासन और समाज एक दूसरे के पूरक हैं ।

शासन के निर्देशों का पालन करना समाज का कर्तव्य है । समाज की सुरक्षा के लिए ही शासन  निर्देश प्रदान करता है । इसलिए हम एक आदर्श नागरिक की भांति कोरोना संकट से निजात पाने के लिए अपने आप को सुरक्षित रखने के लिए शासन के निर्देशों का पालन करें और ध्यान में रखें जैन दर्शन में भी राजाज्ञा पालन करने का नियम है , राजा की आज्ञा का यानि शासन की आज्ञा का पालन करना भी हमारा धर्म ही है । सभी का कल्याण हो प्रशासन अच्छे से कार्य करें और हम सभी शीघ्र ही संकट से मुक्ति पाकर  प्रभु के दर्शन पूजन आदि  क्रियाओं को पूर्व की भांति कर सकें यही कामना है।
मंदिर ट्रस्ट के श्री मनमोहन झाँझरी ने बताया कि वर्ष 2017 में उपाध्याय श्री का चातुर्मास यहां हो चुका है, चातुर्मास उपरांत उपाध्याय श्री श्रवणबेलगोला महा मस्तकाभिषेक में सम्मिलित होने पहुंचे थे और दक्षिण भारत में धर्म प्रभावना कर  मालवा माटी इन्दौर में हम सब के आग्रह पर  पधारे हैं । यहां का चातुर्मास धर्म प्रभावना एवं वात्सल्य पूर्ण होगा । उपाध्याय श्री के आगमन से समाज जनों में अत्यंत हर्ष और प्रसन्नता की लहर है उपाध्याय श्री के निर्देशानुसार शासन के नियमों को पालते हुए हम उपाध्याय श्री की समस्त व्यवस्थाओं को संपन्न करेंगे।

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