उत्तम अकिंचन व्रत धारे, परम समाधि दशा विस्तारे

श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर कोट ऊपर कामां पर पर्यूषण महापर्व के नौवें दिन उत्तम अकिंचन धर्म के दिन प्रथम अभिषेक व शांतिधारा करने के लिए सौधर्म इन्द्र बनने का सौभाग्य विजय कुमार वैभव जैन को मिला।

आचार्य विनीत सागर महाराज ने उत्तम अकिंचन धर्म के बारे में अपने प्रवचनों में बताया कि किंचित मात्र भी परिग्रह नहीं रखना उत्तम अकिंचन धर्म कहलाता है। जिस व्यक्ति ने अंतर बाहर 24 प्रकार के परिग्रहों का त्याग कर दिया है वो ही परम समाधि अर्थात मोक्ष सुख पाने का हकदार है। पूर्णतः परिग्रह का त्याग दिगम्बर साधु ही करते हैं। “परिग्रह चौबीस भेद त्याग करें मुनिराज जी” और श्रावक अपने परिग्रह को कम कर सकता है।

सकल जैन समाज कामां के प्रवक्ता डी के जैन मित्तल ने बताया कल आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर कोट ऊपर पर अनन्त चतुर्दशी मनायी जायेगी। सकल जैन समाज कामां वर्किंग कमेटी द्वारा आयोजित इस विधान में जैन समाज अध्यक्ष महावीर प्रसाद जैन लहसरिया, कोषाध्यक्ष काली जैन, मंत्री कैलाश जैन, अनिल जैन पंसारी, राजेंद्र जैन, गौरव निक्की जैन, वैभव जैन सहित समाज के लोग मौजूद थे।

— डी के जैन मित्तल

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