‘विद्योदय’ को देखने उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

क्षेत्रपाल जैन मंदिर में प्रदर्शित "विद्योदय' फ़िल्म के अवसर पर श्रद्धालु।

ललितपुर। इस सृष्टि के  महान दिगम्बर जैनाचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के संयम स्वर्ण महोत्सव के समापन माह में ललितपुर नगर   में आचार्य श्री के जीवन चरित्र पर बनी डॉक्यूमेंट्री फ्लिम “विद्योदय” का प्रसारण  श्री क्षेत्रपाल जी मंदिर में किया गया, जिसे देखने श्रद्धा का सैलाव उमड़ पड़ा।

यह विद्योदय नामक डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म पूरे भारत में अनेक  जगहों पर प्रसारित हुईं जिसमें नगर के क्षेत्रपाल जैन मंदिर  को भी  यह सौभाग्य प्राप्त हुआ।सतत 3 साल की कड़ी मेहनत के द्वारा फ़िल्म नगरी मुम्बई के कलाकारों और संगीतकारों द्वारा इस डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म का निर्माण करवाया गया।इसमें  आवाज़ फ़िल्म के सूत्रधार प्रसिद्ध अभिनेता आलोकनाथ ने दी है।पूरे भारत में लाखों लोगों ने इस फ़िल्म का प्रसारण देखा और अपने जीवन को धन्य किया।

फ़िल्म के प्रदर्शन के पूर्व जैन पंचायत के पदाधिकारियों, विद्वानों, श्रेष्ठिगणों ने आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चित्र का अनावरण और दीप प्रज्ज्वलन किया।

इसके वाद आचार्यश्री के जीवन पर प्रकाश डाला गया।

क्षेत्रपाल मंदिर में प्रदर्शित उक्त फ़िल्म में देखकर दर्शक श्रद्धालुओं के कई बार पलके और मन भी भीग गया ,जब पूरा का पूरा अष्टगे परिवार मोक्षपथ पर आरूढ़ हो गया। सभी दर्शक दम साधे उन जीवन्त पलों को तब तक आत्मसात करते रहे जब तक पूरी फिल्म समाप्त नहीं हुई। फ़िल्म समाप्त हुई फिर भी अनेको दर्शक अतृप्त, किसी मांत्रिक के मन्त्र प्रभाव में बंधे से बैठे रहे शायद इतनी जल्दी फ़िल्म का समापन उन्हें तृप्ति, संतुष्टि नही दे सका। फ़िल्म को देखने बाल, युवा, वृद्ध आदि का भारी जनसैलाव उमड़ पड़ा जो देखने योग्य था।

इस अवसर पर फ़िल्म को देखकर  जैन पंचायत के अध्यक्ष श्री अनिल अंचल ने बताया कि फ़िल्म में दिखाया गया है कि 50वर्ष पूर्व दीक्षा लेकर आचार्यश्री कैसे संयम मार्ग को अंगीकरण कर रहे हैं। 50 वर्षों के संयम मार्ग को फ़िल्म निर्माता एवं निर्देशक विधि कासलीवाल ने अपने राजश्री प्रोडक्शन के वर्षों के अनुभव का सार दिखाते हुए आचार्यश्री के अनूठे पलों को 1.40 घंटे की फ़िल्म में उतार समाज के सम्मुख रख आचार्यश्री के जीवन सफर में दर्शन कराएं हैं।

जैन पंचायत के महामंत्री डॉ अक्षय टडैया ने कहा कि ‘विद्योदय’ एक शब्द नहीं वरन वर्तमान के वर्धमान, लघुनंदन, छोटे बाबा के नाम से जगविख्यात ,जगतगुरु पूज्य आचार्य विद्यासागर जी के जीवन को जीवंत करने का एक बोना सा प्रयास है। वैसे तो आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के ऊपर पहले भी कई नाटक और उनकी फिल्म बन चुकी हैं, परन्तु इस फिल्म की बात ही अलग है, आचार्यश्री की प्रमुख चर्चित कृति ‘मूकमाटी’ महाकाव्य को आधार बना व बीच बीच में मिट्टी व कुम्भकार की चाक के द्रश्य का फिल्मांकन व पार्श्व में आलोकनाथ की आवाज़ में मूक माटी के छंदों की विवेचना, यह बताते हैं कि निर्देशक व पटकथा लेखक ने मात्र द्रश्यों का फिल्मांकन नहीं किया अपितु आचार्यश्री के लेखन पर पूर्ण रिसर्च कर दृश्यों को बांधा है।

संयोजक प्रदीप सतरवास का कहना है कि यह फिल्म मात्र आचार्यश्री को ही नहीं दर्शाती अपितु यह फिल्म जैनदर्शन और उसके सिद्धान्त व दिगम्बर जैन साधुओं की कठिन चर्या को विश्व को दर्शाती है।

धार्मिक आयोजन समिति के संयोजक मनोज बबीना ने बताया कि फ़िल्म में रेत कलाकार की सरपट उंगलियों का स्पर्श मनोभावों को दर्पण सा उकेर देता। अजमेर के भागचंद जी सोनी के परिवार की माँ जब मुनिश्री विद्यासागर के प्रथम आहार की घटना सुनाती है तब लगता 50 वर्ष पूर्व का वह पल सामने ही हो। जब -जब आचार्यश्री चित्रपटल पर आते लगता  हम सभी साक्षात जीवन्त उनके चरणों मे बैठे हों।

अक्षय अलया बताते हैं कि आचार्यश्री हमेशा स्वदेशी वस्तुओं  के उपयोग की प्रेरणा देते हैं। हथकरघा उनकी इस भावना को साकार रूप कर रहा है। आज अनेक स्थानों पर हथकरघा उद्योग स्थापित हो चुका है।हथकरघा से जहां स्वदेश प्रेम की भावना को बल मिल रहा है वहीं सैकड़ों लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करा रहा है। जेलों में कैदी भी इस कार्य को बड़ी ही रूचि पूर्वक कर रहे हैं।

डॉ सुनील संचय बताते हैं कि परम पूज्य आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज न केवल श्रमण संस्कृति के दैदीप्यमान नक्षत्र हैं बल्कि पूरी भारतीय संस्कृति को उन्होंने अपनी साधना के बल गौरवान्वित किया है। अध्यात्म सरोवर के राजहंस, सम्यग्दर्शन-ज्ञान-चारित्र के महानद, साधना के सुमेरू, भारतीय संस्कृति के अवतार, संत शिरोमणि महाकवि आचार्य श्रेष्ठ विद्यासागर जी महाराज दिगम्बर जैन परंपरा के ऐसे महान संत हैं, जो सही मायने में साधना, ज्ञान, ध्यान व तपस्यारत होकर आत्मकल्याण के मार्ग पर सतत अग्रसर हैं। वे पंचमकाल में चतुर्थकाल सम संत हैं।

इससे पूर्व नगर के सभी जैन मंदिरों में प्रातः समय अभिषेक-शांतिधारा के बाद संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की विशेष पूजन और शाम को भव्य आरती पूरी श्रद्धा भक्ति के साथ की गई। पूरी श्रद्धा और अपार उत्साह के साथ आचार्यश्री का 50वा  दीक्षा दिवस-संयम स्वर्णिम महोत्सव  मनाया गया।

उल्लेखनीय है कि आचार्यश्री पर केन्द्रित उक्त फ़िल्म जहाँ पूरे देश में अनेक स्थानों पर प्रदर्शित की गई वहीं मध्यप्रदेश विधानसभा में भी रविवार को प्रदर्शित की गई जिसे देखने बड़ी संख्या में गणमान्य लोग पहुँचे।

इस अवसर पर जैन पंचायत के अध्यक्ष अनिल अंचल, महामंत्री डॉ अक्षय टडैया, संयोजक प्रदीप सतरवास, क्षेत्रपाल जैन मंदिर के प्रबंधक द्वय राजेन्द्र लल्लू थनवारा, मोदी पंकज जैन पार्षद, कैप्टन राजकुमार जैन,मनोज बबीना, अक्षय अलया, डॉ. सुनील संचय, जितेंद्र जैन राजू, सतेंद्र जैन गदयाना, शुभेन्दू बंट, नीरज मोदी, रिंकू, जिनेंद्र जैन डिस्को, कपुरचंद्र लागोंन, जिनेंद्र थनवारा, सुबोध मड़ावरा, कैलाश सराफ, विमल पाय, प्रभात लागोंन,अजय सर्वोदय, अमित जैन, अभय जैन,वीरेंद्र प्रेस, संजीव जैन, गेंदालाल सतभैया, राजकुमार खिरिया, संजय मोदी,  वीरेंद्र बछरावनी, पिंटू जैन, आशीष जैन, शीलचंद्र, पुष्पेंद्र, सुरेन्द्र जैन, अंतिम जैन आदि प्रमुखता से उपस्थित रहे।

 

–डॉ सुनील संचय

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