9 Pusphadant Bhagwan

नौवें तीर्थंकर पुष्पदन्त जी हैं। भगवान पुष्पदन्त जी का जन्म काकांदी नगर में कृष्ण पक्ष की पंचमी को मूल नक्षत्र में हुआ था। पुष्पदंत जी एक युवा तीर्थंकर थे।
इक्ष्वाकु वंश के राजा सुग्रीव और रामा देवी के घर जन्मे पुष्पदंत जी के जन्म का नाम ‘सुवधि’ ही रखा था, इसलिए भगवान पुष्पदन्त को ‘सुवधिनाथ’ भी कहा जाता है। पुष्पदन्त जी के शरीर का वर्ण श्वेत (सफ़ेद) और इनका चिह्न मकर (मगर) था। एक सामान्य राजा का जीवन बिताने के बाद तीर्थंकर पुष्पदन्त जी ने आत्मकल्याण के पथ पर जाने का निश्चय किया।
वर्षीदान द्वारा जनता की सेवा कर, मार्गशीर्ष कृष्णा षष्ठी के दिन भगवान ने दीक्षा स्वीकार की। चार माह की साधना कर कैवल्य पद प्राप्त कर प्रभु पुष्पदंत जी ने धर्मतीर्थ की स्थापना की। भाद्र शुक्ल पक्ष नवमी को पुष्पदंत जी ने साधना अवस्था में शेष अघाती कर्मों को नष्ट कर सम्मेद शिखर पर निर्वाण पद प्राप्त किया।

Heaven Anatadevaloka
Birthplace Kanandinagari
Diksha Place Samed Shikharji
Father’s Name Sugrivaraja
Mother’s Name Ramarani
Complexion white
Symbol crab
Height 100 dhanusha
Age 200,000 purva
Tree Diksha or Vat Vriksh Sali
Attendant spirits/ Yaksha Ajita and Sutaraka
Yakshini Mahakali
First Arya Varahaka
First Aryika Varuni

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