20 वर्षीय पायल भक्ति रंग में ऐसी रंगी कि सब छोड़ बनी आर्यिका


पंजाब के बठिंडा नगर की 20 वर्षीय पायल भौतिकतावाद एवं गृहस्त जीवन को छोड़ आत्मलीनता हेतु वैराग्य पथ पर चल पडी हैं। सूर्यनगर श्री पाश्र्व-पद्मावती मंदिर में पायल ने रविवार को आर्यिका दीक्षा ग्रहण कर ली। मंदिर में प्रात:काल में पूजा-अर्चना के बाद सूरत के समाजसेवी भरतभाई ने ध्वजारोहण किया। इसके बाद पायल की गोद भराई और तिलक की रस्में पूरी की गई, जिसमें पायल के गृहस्त जीवन के सभी रिश्तेदारों सहित पंजाब, हरियाणा, हैदराबाद एवं दिल्ली समेत कई स्थानों से आये श्रद्धालु शामिल थे।

दुल्हन की तरह सजी पायल की दीक्षा से पहले धर्मयात्रा निकाली गई, जिसमें पायल ने जमकर रुपयों और सिक्कों की वष्रा की। धर्मयात्रा के पश्चात दीक्षा कार्यक्रम की शुरूआत हुई। दीक्षा देने से पूर्व आचार्य श्री विजय मुनि ने पायल को बताया कि वैराग्य का मार्ग सबसे कठिन है और यदि अभी भी यदि उसके मन में जरा सा भी संशय है तो वो दीक्षा लेने से इनकार कर सांसारिक जीवन ब्यतीत कर सकती है। इसके बाद पायल ने एक भक्ति भजन के द्वारा दीक्षा लेने की इच्छा जाहिर करते हुए सभी सांसारिक बंधनों से मुक्त होने की अपनी इच्छा का इजहार िकया।

पायल की इच्छा जानने के बाद दीक्षार्थी बहन पायल का सभी श्रृंगार हटाया गया और उसे श्वेत वस्त्र पहनाकर मंच पर लाया गया, जहां आचार्यश्री ने जैन संत कस्तूर चंद्र जी सहित श्रद्धालुओं की मौजूदगी में दीक्षा प्रदान की। इस मौके पर आचार्यश्री ने कहा कि एक मात्र भक्ति का रंग ऐसा होता है, जिस पर कोई रंग नहीं चढ़ सकता। जब इंसान पर भक्ति का रंग चढ़ जाता है तो उसे सांसारिक रंग तुच्छ लगने लगता है। पायल योग साधना केंद्र में पढ़ने के लिए अपने मूल निवास बठिंडा से यहां आई थी और उस पर भक्ति का ऐसा रंग चढ़ा कि उसने संसार के सभी बंधनों को छोड़ने का मन बना लिया और अर्यिका दीक्षा ग्रहण कर ली।


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