देश की सबसे बड़ी चंद्रप्रमु की प्रतिमा 1500 किमी. का सफर 25 दिन में तय कर दुर्ग पहुंची


दुर्ग की धरती पर शिवनाथ तट पर निर्माणाधीन निसया तीर्थ की वेदी पर लगने वाली देश की सबसे विशाल भगवान चंद्रप्रमु की प्रतिमा सोमवार को वेदी पर विराजमान किया गया। इस प्रतिमा की ऊंचाई 21.3 फीट और वजन 100 टन है। इसे वेदी पर स्थापित करने के लिए सात घंटे मशक्कत करनी पड़ी और इसे मोबाइल क्रेन की मदद से वेदी पर पहुंचाया गया। एक ही पत्थर से निर्मित पद्मासन प्रतिमा को बिजौरिया, राजस्थान में तैयार की गई विशाल प्रतिमा को 56 पहियों वाली ट्राली गाड़ी से लगभग 1500 किमी. के सफर में 25 दिनों के बाद यहां सुरक्षित पहुंचाई गई।

श्री दिगम्बर जैन खंडेलवाल पंचायत द्वारा शिवनाथ तट पर करकीब 10 एकड़ क्षेत्र में इस तीर्थ का निर्माण कराया गया है। इस मंदिर में मूलनायक के रूप में भगवान चंद्रप्रभु की विशाल प्रतिमा विराजमान होगी। तीर्थक्षेत्र में सल्लेखना व्रत लेने वाले मुनि आध्यात्म सागर और आर्यिका सुनिर्णयमति की समाधियां भी बनाई जाएंगी। मूलनायक की स्थापना के बाद बाकी बचा निर्माण कार्य पूर्ण कराया जाएगा। बता दें कि देश की सबसे बड़ी और वजनी प्रतिमा प्रात: 10.00 बजे वेदी पर स्थापना हेतु कार्य शुरु किया गया।

लोहे के डोरे से प्रतिमा को लपेटकर मोबाइल क्रेन से उठाने का प्रयास किया। इसके लिए खास तरह के पटटे मंगवाये गए। दर्जन भर टेक्नीशियनों की मदद से काफी मेहनत और मशक्कत के बाद लगभग 06.00 बजे कमल की वेदी पर प्रतिमा को रखा जा सका। जब तक प्रतिमा वेदी पर स्थापित नहीं हो गई तक तब नवकार मंत्र का जाप लगातार चलता रहा। वेदी पर स्थापित करने से पूर्व विशाल मूर्ति की नगर में शोभायात्रा निकाली गई, जो सरदार बल्लभभाई पटेल चौक से शुरु की गई। शोभायात्रा में नगर के बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग सम्मिलित हुए।

बता दें कि आचार्य श्री विद्यासागर जी और आचार्य विशुद्ध सागर जी की प्रेरणा और मार्गदर्शन में तीर्थ का निर्माण कराया जा रहा है। मुर्ति पूजक संघ के अध्यक्ष कांतिलाल बोथरा के अनुसार इस तीर्थ का निर्माण पूर्ण होने में लगभग एक वर्ष का समय और लगेगा।


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