भगवान पार्श्वनाथ की ऐसी चमत्कारी प्रतिमा, जो रुकने के बाद आगे नहीं ले जाई जा सकी, जाने


मध्य प्रदेश राज्य के सागर नगर में स्थित नवीन जैन मंदिर में एक ऐसी अतिशयकारी चमत्कारी भगवान पार्श्वनाथ की ऐसी प्रतिमा है, जिसे बैलगाड़ी में रखकर स्थापना हेतु कहीं अन्य स्थान ले जाया जा रहा था किंतु रात्रि विश्राम के बाद उक्त बैलगाड़ी, जिस पर प्रतिमा विराजित थी, लाखों प्रयासों के बाद वह एक फुट भी आगे नहीं बढ़ पाई और प्रतिमा को उसी नगर में स्थापित करना पड़ा। जानकारी के अनुसार नगर के नवीन जैन मंदिर में 124 वर्ष पूर्व भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा की स्थापना श्रीमंत परिवार द्वारा की गई थी। बता दें कि लगभग 124 वर्ष पूर्व शिल्पकार प्रतिमा को बैलगाड़ी में रखकर ले जा रहा था। रात में वह विश्राम करने श्रीमंत परिवार में रुका।

प्रात:कालीन जब वह प्रतिमा को बैलगाड्री से आगे की तरफ प्रस्थान करने के लिए तैयार हुआ किंतु काफी कोशिशों के बाद बैलगाड़ी उस स्थान से टस से मस नहीं हुई। इस अदभुत अविश्वसनीय घटना का जैसे ही पता नगरवासियों को चला तो इस चमत्कार को देखने भारी संख्या में लोग इकट्ठे हो गये। बैलगाड़ी के कतई आगे न बढ़ने की स्थिति में समाज के वरिष्ठजन सेठ श्रीमंत ने उस मूर्तिकार से उसे न्यौछावर राशि देकर उस मूर्ति के क्रय हेतु बात की। पहले तो भव्य विशालकाय पद्मासन मूर्ति को बेचने के लिए तैयार नहीं हुआ किंतु बाद में वह मान गया। इसके बाद भगवान पार्श्वनाथ की भव्य विशालकाय प्रतिमा उसी स्थान पर विराजित कर विशाल मंदिर बनवाया गया जो आज भी सम्पूर्ण बुंदेलखंड के श्रद्धालुओ के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है।


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