वीतरागता के आकर्षण से सिद्धत्व की प्राप्ति का तीर्थ है सिद्धवरकूट-आचार्यश्री विद्यासागर

सिद्धवरकूट । एक बार यदि हमारी दृष्टि वीतरागता की ओर जम जाती है तो फिर दृष्टि दूसरी ओर नहीं जा पाती । चक्रवर्ती कामदेव की भी दुनिया में अपनी कामना की पूर्ति नहीं हुई, वह यहां पर हुई । इसलिए दो चक्री, दस कामदेव सहित साढ़े तीन करोड़ मुनिराजों ने यहां आकर सिद्ध पद की प्राप्ति की है । चक्रवर्ती-कामदेव-तीर्थंकर ये सब पद महत्वपूर्ण नहीं है । सबसे महत्वपूर्ण यदि कोई पद है तो वह सिद्ध पद ही है, सिद्धवरकूट में वीतरागता का आकर्षण है जो सिद्धत्व की प्राप्ति करा सकता है । उक्त प्रेरक उद्बोधन राष्ट्रसंत, संत षिरोमणि आचार्यश्री विद्यासागरजी मुनिराज ने अपने 31 षिष्यों के साथ सिद्धवरकूट प्रवेष के उपरांत दिया । आचार्यश्री ने दुकानदार व ग्राहक के माध्यम से उदाहरण देते हुए कहा कि आप भले ही बड़े-बड़े शोरुम खोल लो लेकिन जो यहां मिलेगा वह कही और नहंी मिलेगा जो कहीं नहीं मिलेगा वह यहां मिलेगा । चक्रवर्ती कामदेव को भी यहीं रेवा तट आकर उनके इष्ट मिले थे यह वही भूमि है ।

क्षेत्र के प्रचार-प्रसार प्रमुख राजेन्द्र महावीर सनावद ने बताया कि सिद्धोदय सिद्धक्षेत्र नेमावर से लगभग 135 किमी पद विहार घनघोर जंगलों के बीच करते हुए आचार्यश्री 23 वर्ष बाद सोमवार 23 दिसम्बर 2019 को प्रातः 8ः15 बजे सिद्धवरकूट पहुंचे है । प्रथम पाद प्रक्षालन किरणबाई, सुंदरबाई लष्करे परिवार (सनावद) ने किया । क्षेत्र कमेटी अध्यक्ष प्रदीपकुमारसिंह कासलीवाल, महामंत्री विजय काला, वर्किंग ट्रस्टी बाबूलाल जैन, आषीष चौधरी, मुकेष जैन, संतोष मामा, कैलाष मोटाघर, अमरीष जैन, नरेष मामा, सुनील ठेकेदार, नरेन्द्र जैन, विजय जैन, सुधीर चौधरी, आषीष जैन, दिलीप पहाड़िया, आषीष झांझरी, डॉ.नरेन्द्र जैन, दिनेष पाटनी, हेमचंद पाटनी सहित सैकड़ो श्रद्धालुओं ने जय-जयकार के साथ आचार्य संघ की आगवानी की । संचालन बा.ब्र.सुनील भैया ने किया । पूर्व दिषा के नवीन द्वार से आचार्य संघ ने प्रवेष कर मूलनायक श्री संभवनाथ मंदिर के दर्षन किये, उपरांत समस्त मंदिरों के दर्षन कर विगत 22 वर्षों में क्षेत्र पर हुई प्रगति को लेकर प्रसन्नता व्यक्त की ।

आचार्य संघ के चौके लगाने की होड़

कमेटी के आषीष चौधरी ने बताया कि आचार्यसंघ को आहारदान देने के लिए संपूर्ण देषभर से समाजजन आ रहे है, 35 चौके चल रहे है, 40 चोकों की वेटिंग है । सिद्धवरकूट प्रवास का प्रथम आहार एनएचडीसी के उपमहाप्रबंधक आषीष जैन गुलजारीलालजी जैन, बंगला चौराहा अषोक नगर) वालों के यहां संपन्न हुआ । सभी श्रद्धालुओं की भोजन व्यवस्था महामंत्री विजय-विमलचंदजी काला परिवार सनावद द्वारा की गई ।

कासलीवाल परिवार की परम्परा का उल्लेख

आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज ने क्षेत्र अध्यक्ष प्रदीपकुमारसिंह कासलीवाल के पिताश्री व उनके परिवार की परम्परा का उल्लेख करते हुए कहा कि वे भी आते रहते थे, ये भी समय-समय पर आते रहते है, याद दिलाते रहते है, अपना कर्तव्य पूरा करते रहते है । अपने पूर्व प्रवास का उल्लेख करते हुए आचार्यश्री ने कहा कि 23 वर्ष पूर्व वे सिद्धवरकूट से ऊन पावागिरिजी होते हुए बावनगजा, मांगीतुंगी के दर्षन हेतु गए थे । सभी क्षेत्रों के प्रति निष्ठा रखें, हमेषा याद रखें कि जब चक्रवर्ती-कामदेव को अपना रुप पसंद नहीं आया तो फिर हमें समझना चाहिए कि तीर्थों पर जड़ सम्पदा की कामना से नहीं सिद्धत्व की कामना से आना चाहिए ।

गुरु ने स्वयं षिष्य का षिष्यत्व स्वीकार किया था

बा.ब्र.सुनील भैया अनंतपुरा वाले ने बताया कि आचार्य विद्यासागरजी महाराज ने 52 वर्ष पहले दिगम्बरी दीक्षा ग्रहण की थी, उनके गुरु आचार्यश्री ज्ञानसागरजी महाराज ने अपने षिष्य को आचार्य पद पर प्रतिष्ठापित किया था और स्वयं उनका षिष्यत्व स्वीकार किया ऐसा उदाहरण इतिहास में बहुत कम देखने को मिलता है ।

सिद्धवरकूट में है प्रवास की संभावना

निमाड़-मालवा के भक्तों द्वारा संभावना व्यक्त की जा रही है कि आचार्य संघ 23 वर्ष बाद सिद्धवरकूट आया है, अतः सिद्धवरकूट में आचार्यश्री शीतकालीन वाचना व अनेक आयोजनों की संभावना व्यक्त की जा रही है । अध्यक्ष प्रदीप कासलीवाल ने बताया कि सिद्धवरकूट कमेटी लम्बे समय से आचार्यश्री से निवेदन करती रही है । कमेटी की प्रबल इच्छा है कि आचार्यश्री की प्रेरणा एवं आषीर्वाद से क्षेत्र पर उल्लेखनीय कार्य संपन्न हो ।

सिद्धवरकूट से किया था मांस निर्यात बंद करों का आह्वान

प्रचार-प्रसार समिति के राजेन्द्र महावीर ने बताया कि आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज ने 1997 में सिद्धवरकूट से ही मांस निर्यात बंद करने का आह्वान किया था । मांस निर्यात बंद करों का आह्वान एक आंदोलन के रुप में सिद्धवरकूट की पवित्र भूमि से संपूर्ण देष में फैला था । आचार्यश्री की प्रेरणा से देषभर में सैकड़ों गौ-षालाएं संचालित है । आचार्यश्री के सिद्धवरकूट प्रवास के दौरान विषाल प्रवचन हॉल का संकल्प तत्कालीन अध्यक्ष जैन रत्न देवकुमारसिंह कासलीवाल व तत्कालीन महामंत्री तीर्थ भक्त इन्दरचंदजी चौधरी के नेतृत्व में क्षेत्र कमेटी ने लिया था । आचार्यश्री के सान्निध्य में भूमि पूजन के उपरांत उक्त हाल लगभग 15 वर्षों से आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज के चरणरज की बाट जोह रहा है । आचार्य विद्यासागरजी प्रवचन हाल निर्माण के उपरांत पहली बार आचार्यश्री के प्रवचन उक्त हाल में सुनने को मिल सकेंगे ।

                                                            — राजेन्द्र जैन महावीर

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