Muni Pungav Shree 108 Sudhasagar Ji Maharaj


  • पूर्व नाम : श्री जय कुमार जैन
  • पिता : श्री रूपचन्द्र जैन
  • माता : श्रीमती शन्तिबाई जैन
  • जन्म स्थान : ईशुरवारा (जिला : सागर ), म०प्र०
  • जन्म तिथि : मार्गशीर्ष शुक्ल सप्तमी (मोक्ष सप्तमी ), सम्वत २०१५ तदनुसार दि. २१ अगस्त १९५८
  • दिन गुरुवार
  • शिक्षा : बी.कोम
  • भ्राता : २ (ज्येष्ठ श्री ऋषभ कुमार जैन , कनिष्ठ श्री ज्ञान चन्द्र जैन)
  • भगिनी : २(निरंजना , कंचनमाला)
  • विवाह : नहीं किया ( आजन्म बाल ब्रम्हचारी )
  • ब्रम्हचर्य व्रत : आचार्य श्री १०८ विद्यासगर जी महाराजसे
  • श्रीदिगम्बर जैन सिद्ध क्षेत्र नैनागिर जी में १९ अक्तूबर १९७८
  • क्षुल्लक दीक्षा : १० जनवरी १९८० को नैनागिर में आचार्य श्री १०८ विद्यासागर जी महाराजजी से
  • और नाम पाया क्षुल्लक श्री परमसागर
  • एलक दीक्षा : १५ अप्रेल १९८२ को सागर म०प्र० में भगवान महावीर जयन्ती के पावन दिन (आचार्य श्री १०८ विद्यासागर जी महाराज से)
  • मुनि दीक्षा : अश्विन क्रष्ण त्रतीया तदनुसार दिनान्क : २५ सितम्बर १९८३ को ईसरी
  • (जिला गिरिडीह बिहार) में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से परम जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण की और नाम पाया मुनि श्री सुधासागर जी महाराज

श्री सुधासागरजी की आरती

सुधासागर की, गुण आगर की शुभ मंगल दीप सजाय के ।

मैं आज उतारूं आरतिया ॥

रूप श्री श्री शान्तिदेवी के, गर्भ विषै मुनि आये।

ईसर ग्राम में जन्म लिया है, सब जन मंगल आये ॥

मुनिवर सब जन मंगल गाये ॥

न रागी की , न द्वेषी की, ले आतम ज्योति जगाय हो ।

मैं आज उतारूं आरतिया॥

गुरू उपवास व्तरों के धारी , आतम ब्रम्ह विहारी ।

खड्गधार शिवपथ पर चलकर शिथिलाचार निवारी ॥

मुनिवर शिथिलाचार निवरी ॥

गृह त्यागी की , वैरागी की, ले दीप सुमन का थाल हो ।

मैं आज   उतारूं आरतिया॥

गुरूवर आज नयन  से लखकर , आलौकिक सुख पाया ।

भक्तिभाव से आरति करके , फूला नहें समाया ॥

मुनिवर फूला नहीं समाया ॥

ऐसे ऋषिवर को, ऐसे मुनिवर को , कर वन्दन बारम्बार हो।

मैं आज उतारूं आरतिया॥

सुधासागर की , गुण आगर की, शुभ मंगलदीप सजाये के।

मैं आज उतारूं आरतिया ॥


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