मुनिश्री प्रमाण सागर जी के सान्निध्य में भगवान महावीर स्वामी को निर्वाण लाडू चढ़ाकर मनाई दिवाली


बावनगजा। सिद्धक्षेत्र बावनगजा में महावीर स्वामी के मोक्ष दिवस पर निर्वाण लाडू चढ़ाकर दिवाली मनाई गई। इस कार्यक्रम में देश-विदेश से बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। वहीं मंगलवार से तीन दिनी भावना योग शिविर का आयोजन शुरू हुआ। इसमें 300 से ज्यादा युवाओं ने भाग लेकर याेग क्रियाएं की। सभी कार्यक्रम मुनिश्री प्रमाण सागर जी  महाराज और विराट सागर जी  महाराज के सान्निध्य में हो रहे हैं।

ट्रस्टियों ने बताया बावनगजा में सुबह 9.30 बजे कार्यक्रम की शुरुआत हुई। महावीर स्वामी की शांतिधारा, अभिषेक, पूजन कर निर्वाण कांड का वाचन किया गया और निर्वाण लाडू चढ़ाया गया। निर्वाण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य वडाेदरा, झांसी, नागपुर, अहमदाबाद और बड़वानी से आए समाज के लोगों को प्राप्त हुआ। इसी कार्यक्रम के साथ बावनगजा में चल रहे मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज और विराट सागर जी महाराज का चातुर्मास भी पूरा हुआ। मुनिश्री ने निष्ठापन कर संकल्प मुक्त हुए। वहीं बावनगजा में मंगलवार से तीन दिनी भावना योग शिविर का आयोजन शुरू हुआ है, जो 31 अक्टूबर तक चलेगा। इसमें शामिल सभी युवा 15 से 25 साल की आयु वाले हैं। सुबह 5.30 बजे से युवाओं को याेग क्रियाएं कराई जा रही हैं और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दी जा रही है।

सिद्धक्षेत्र में 84 मंडलीय सिद्ध चक्र महामंडल विधान होगा

सिद्धक्षेत्र बावनगजा जी में 4 नवंबर से 84 मंडलीय सिद्ध चक्र महामंडल विधान शुरू होगा। इसको लेकर तैयारियां चल रही है। ट्रस्टियों ने बताया मंडल तैयार कराए जाए जा रहे हैं। इस कार्यक्रम में देश-विदेश के हजारों की संख्या में समाज के लोग भाग लेंगे। उन्होंने बताया बावनगजा में पहली बार इतने बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसके पहले 64 मंडलीय विधान कराया गया था। सभी कार्यक्रम मुनिश्री प्रमाण सागर और विराट सागर महाराज के सानिध्य में होंगे।

मुनिश्री बोले- योग से आत्मविश्वास, स्वास्थ्य और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है

मोक्ष कल्याणक महोत्सव :

मुनिश्री प्रमाण सागर जी  महाराज ने महावीर स्वामी के बारे में बताया उन्होंने राजा के यहां जन्म लिया था लेकिन संसार के लिए उन्होंने त्याग किया और वैराग्य धारण कर संयम का मार्ग अपनाया। सिद्धक्षेत्र पावापुरी में निर्वाण लक्ष्मी को प्राप्त किया। इसी दिन उनके शिष्य गौतम स्वामी को शाम के समय केवलज्ञान लक्ष्मी को प्राप्त किया। महावारी स्वामी ने अपने भव्य समवशरण का भी त्याग किया। समवशरण इस संसार की सबसे सुंदर और भव्य रचना होती है। मुनिश्री ने बताया आप सभी संसार में रह रहे हो, तुम्हें उसमें रस आ रहा है और इसी वजह से तुम्हें मुक्ति नहीं मिलेगी। आपको इस रस से मुक्त होना होगा। तभी इस जन्म-मृत्यु से मुक्त होंगे। आप कितनी भी तीर्थ यात्राएं कर लो, जब तक आप अपनी अंतर आत्मा में नहीं रमोगे, तब तक इस दुनिया में जन्म-मरण के फेर में पड़े रहोगे।

भावना योग शिविर:

सिद्धक्षेत्र बावनगजा में शुरू हुए भावना योग शिविर के दौरान मुनिश्री प्रमाण सागर ने बताया इस शिविर के माध्यम से देश-विदेश के कई लोग अपनी अच्छी दिनचर्या, स्वास्थ्य और व्यापार को लेकर लाभ ले रहे हैं। ट्रस्टियों ने बताया दोपहर में शिविर के दौरान पर्सनालिटी डेवलपमेंट को लेकर वक्ता प्रशांत जैन ने जीवन की उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्हाेंने बताया कि किस तरह से आगे बढ़ सकते हैं और चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। योग से आत्मविश्वास, स्वास्थ्य और जीवन मे आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। कई बीमारियों के मरीज भी योग से ठीक हुए है। योग से कई लोगों की दिनचर्या बदल जाती है।

— अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी


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