24 तीर्थंकरों की प्रतिमाएं पालकी में लेकर निकला जैन समाज


उज्जैन, जैन समाज में प्रदेश का पहला सबसे बड़ा नौ दिनी 24 समोशरण विधान शनिवार को विनोद मिल परिसर स्थित दिगंबर जैन मंदिर में प्रारंभ हुआ। सुबह 8.30 बजे फ्रीगंज स्थित दिगंबर जैन मंदिर से कलश यात्रा निकली। यात्रा में केशरिया साड़ी पहने एक साथ 300 महिलाएं सिर पर कलश रखकर शामिल हुईं। बैंड, बग्घी व ध्वज पताकाएं के साथ विधान में स्थापित होने वाली 24 तीर्थंकर भगवान की प्रतिमाओं को समाज के पुरुष पालकी में विराजित कर उन्हें कंधों पर उठाकर चल रहे थे। कई प्रतिमाएं रथ में भी विराजित कर निकाली गई।

फ्रीगंज पंचायती दिगंबर जैन मंदिर से शुरू हुई यात्रा टावर चौक, चामुंडा माता चौराहा़ होकर मिल परिसर स्थित मंदिर पहुंची। जहां महिलाओं ने विधान स्थल की परिक्रमा कर कलशों के जल से भूमि शुद्धि की। यात्रा में उपाध्याय निर्भय सागर महाराज का भक्तों ने मार्ग में कई जगह पाद प्रक्षालन किया। दिनेश कुमार मनीष कुमार पांड्या ने ध्वजारोहण कर विधान का शुभारंभ किया। मुनिश्री को शास्त्र भेंट किए गए। भगवान की 24 प्रतिमाएं का अभिषेक, शांतिधारा की गई। धार्मिक क्रिया सुनील भैया ने कराई। शाम को दिल्ली के कलाकार मनोज शर्मा ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। विधान में प्रमुख रूप से धर्मेंद्र सेठी, अशोक जैन चायवाला, सचिन कासलीवाल, दिनेश पांडिया, सुनील जैन ट्रांसपोर्ट, इंदरमल जैन, देवेंद्र इंजीनियर, विमलेश जैन, ललित सेठी, कमल सेठी, प्रकाश बुथा, सुभाष सिंघाई, हीरालाल बिलाला, वीरसेन जैन, जिनेंद्र चनेवाला, महेश जैन, देवेंद्र जैन, ओम जैन, अमृतलाल जैन, फूलचंद छाबड़ा, विमल जैन आदि थे।

आज पांडाल उद्घाटन

विधान के लिए रविवार को पांडाल का उद्घाटन होगा। सुबह 6.30 से 9 बजे तक शांतिधारा, अभिषेक, विधान एवं प्रवचन होंगे। दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक उपाध्याय श्री के सानिध्य में तत्व चर्चा, महाआरती व सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।

पुरुष तीर्थ और महिलाएं कलश यात्रा करें

उपाध्याय निर्भय सागर महाराज ने धर्मसभा में कहा जीवन में मरघट यात्रा से पहले पुरुष तीर्थ यात्रा और महिलाएं कलश यात्रा जरूर कर लें, क्योंकि यात्राओं में पदयात्रा, रथयात्रा, शोभायात्रा, और मोक्ष यात्रा जैसी अनेकों यात्राएं होती हैं। इनमें तीन यात्रा तीर्थ, कलश और मोक्ष यात्रा जो जीवन से लेकर मरण तक जुड़ी हैं। इन्हीं में प्रभु व तत्वज्ञान छुपा है।

दिगंबर जैन मंदिर फ्रीगंज से कलश यात्रा निकली। इस दौरान समाज के पुरुष कंंधों पर पालकी में विराजित तीर्थंकर भगवान की प्रतिमाएं लेकर चल रहे थे।

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