उत्तम ब्रह्मचर्य मन लावे, नरसुर सहित मुक्ति फल पावें

श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर कोट ऊपर कामां पर पर्यूषण महापर्व के अंतिम दिन दसलक्षण महामण्डल विधान के उत्तम ब्रह्मचर्य के दिन प्रथम अभिषेक व शांतिधारा करने के लिए सौधर्म इन्द्र बनने का सौभाग्य दुलीचंद सचिन जैन को मिला। आचार्य विनीत सागर महाराज के गुरू परंपरा के प्रथमाचार्य शांतिसागर महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर दीक्षा दिवस मनाया गया और मंगलाचरण डी के जैन मित्तल ने किया।

आचार्य विनीत सागर महाराज ने उत्तम ब्रह्मचर्य पर अपने प्रवचनों में बताया कि ब्रह्मचर्य के अभाव में साधना बेकार है जिसके पास ब्रह्मचर्य होता है देवता भी उसके आगे नतमस्तक होते हैं। अपनी आत्मा में रमण करना ही ब्रह्मचर्य कहलाता है।

सकल जैन समाज कामां के प्रवक्ता डी के जैन मित्तल ने बताया कि आज कोट ऊपर जैन मंदिर में वासपूज्य भगवान के मोक्षकल्याणक के अवसर पर निर्वाण लाडू चढाया गया। आज अनंत चतुर्दशी पर भगवान अनन्तनाथ की विशेष पूजा-अर्चना की गई। आज चारों मंदिरों में केसरिया वस्त्र पहनकर बड़े ही भक्ति भाव के साथ पूजन अभिषेक किये गये। कामां जैन समाज वर्किंग कमेटी द्वारा आयोजित दसलक्षण महामण्डल विधान में जैन समाज अध्यक्ष महावीर प्रसाद जैन लहसरिया, कोषाध्यक्ष काली जैन, मंत्री कैलाश जैन, मूलचंद जैन, पदम जैन टाल वाले, अनिल जैन पंसारी, राजेंद्र जैन, निक्की जैन सहित समाज के स्त्री पुरुष और बच्चे मौजूद थे।

— डी के जैन मित्तल

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