बड़ौत के ऋषभदेव सभाकार में हुआ जैन धर्म की दो धाराओं का संगम


बड़ौत के तीर्थकर ऋषभदेव सभागार में मुनि मायाराम एवं गुरुदेव योगीराज रामजी लाल की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में जैन धर्म की दो धाराओं का मिलन हुआ। इस पुनीत अवसर पर सवा करोड़ नवकार मंत्र की पूर्णाहुति भी हुई। रविवार को ऋषभदेव सभागार में हुए धार्मिक कार्यक्रम में जैन स्थानकवासी एवं दिगम्बर जैन समाज के महामुनियों का संगम हुआ। जैन स्थानक में चातुर्मास कर रहे आचार्य सुभद्र मुनि एवं दिगम्बर जैन संत विहर्ष सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में गुणगान महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। महोत्सव में शामिल होने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालुगण आये थे। इस मौके पर चूड़ामणि मुनि मायाराम एवं गुरुदेव रामजी लाल के जीवन पर आधारित नाटिकाओं का मंचन किया गया।

इस दौरान बीच-बीच में संगीतमय भजनों की प्रस्तुति ने वातावरण को पूर्णरुपेण रसमय कर दिया। सचित्र तत्वार्थ सूत्र ग्रंथ का विमोचन समाज के नरेश चंद्र जैन एवं उर्मिल जैन द्वारा किया गया। कार्यक्रम में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान सहित उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बड़ौत पहुंचे। इस मौके पर सकल दिगम्बर जैन समाज, जैन स्थानकवासी समाज, कन्या विद्यालय शिक्षा सोसायटी, दिगम्बर जैन हाई स्कूल एसोशिएसन, श्री मैढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज, जैन स्थानकवासी समाज महिला संघ, श्वेताम्बर स्थानकवासी युवा संघ सहित भारतीय जैन मिलन की विभिन्न शाखाओं का विशेष सहयोग मिला।

कार्यक्रम में 12वीं कक्षा में अच्छे प्रदर्शन के लिए छात्रा सुकृति गुप्ता को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य का जैन समाज ने अभिनंदन किया और उन्हें मायाराम सद्भावना सम्मान 2016 से भी अलंकृत किया गया। जैनाचार्य सुभद्र मुनि ने गुरु की महिमा प्रस्तुत करते हुए कहा कि गुरू जीवन के निर्माता हैं। दोनों गुरु के आदर्श आज भी समाज को प्रेम, सौहाद्र्र, मानवीय गुणों की प्रेरणा देते हैं। इस अवसर पर विहसंत सागर जी, मुनि श्री विजये सुमित मुनि, बसंत मुनि, साध्वी रत्न निर्मल यश ज्योति, साध्वी रत्न मानवी जी ने भी गुरु का गुणगान किया।


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