अदालती कार्य अपनी भाषा में हो, इस पर विचार होना चाहिए: आचार्यश्री


भोपाल, देश स्वतंत्र हो गया, नागरिकता भी मिल गयी किंतु आज 70 वर्षो के बाद भी न्यायिक अदालतों से सर्वोच्च न्यायालय तक का काम आज भी अंग्रेजी में हो रहा है। देश के अधिक्तर लोगों को अंग्रेजी नहीं आती और भाषा के मामले में उनकी भी स्वतंत्रता छीन ली गई है। ऐसे विचार आचार्य विद्यासागर जी महाराज ने विश्व अहिंसा दिवस पर लाल परेड ग्राउंड में हुए क्षमावाणी पर्व पर व्यक्त किये।

उन्होंने कहा कि अंग्रेजी का पूरा ज्ञान न होने से मामलों की पेशी की तारीख-दर-तारीख बढ़ती जाती रहती हैं और कई वर्षो तक गरीब-स्वाभिमानी व्यक्ति को अपने गुनाह, दोष के बारे में स्पष्टतया पता ही नहीं चल पाती है। इसलिए आज जरूरी है कि देश को अपनी भाषा के बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि आजादी के 70 वर्षो के बाद भी अंग्रेजी हावी है। विशेषकर न्याय के क्षेत्र में। उन्होंने बताया कि शिक्षा हमेशा कर्म की होती है। शिक्षक कभी कर्मी नहीं होता किंतु अब शिक्षाकर्मी की हवा चल रही है। शिक्षा भारतीय संस्कृति के आधार पर होनी चाहिए किंतु शिक्षा बिना सींग और पूंछ के चल रही है। इसीलिए आज बड़े-बड़े स्नातक बेरोजगार घूम रहे हैं तो क्षमा किस बात की मांगते हो।

मौजूदा शिक्षा व्यवस्था पर चिंता जाहिर करते हुए आचार्यश्री ने कहा कि एमबीए, पीएचडी की उपाधि प्राप्त करने वाले चपरासी की नौकरी के लिए आवेदन कर रहे हैं। यह हमारे लिए बहुत ही शर्म की बात है। उन्होंने किसानों की समस्या उठाते हुए कहा कि असली रूप से श्रमिक मैं किसान को मानता हूं। शासन को श्रमिकों की चिंता करनी चाहिए और पूंजी-पतियों पर नजर रखनी चाहिए। किसान को फसल का वाजिब दाम मिले। उन्होंने अंत में कहा कि श्रमिकों का शोषण किया जाएगा तो आपकी कोई भी प्रार्थना ईश्वर की शरण में मंजूर नहीं हो सकती।


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