क्षमाधर्म से ही होगा विश्वव्यापी समस्याओं का हल : आचार्यश्री


भोपाल में चातुर्मासरत आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ससंघ की उपस्थिति की वजह से आत्मशुद्धि के पावन पर्व पर्युषण पर्व विशेष उल्लास एवं भक्तिभाव के साथ शुरू हुआ। पर्युषण पर्व की शुरूआत मंगलवार को क्षमा धर्म की उपासना के साथ शुरू हुआ। शहर के विभिन्न जैन मंदिरों में प्रात: से ही अभिषेक, जिन पूजा-अर्चना के साथ क्षमा धर्म की विशेष आराधना की गई। इस अवसर पर विभिन्न मंदिरों में सजावट की गई है।

हबीबगंज जैन मंदिर में पर्युषण पर्व के पहले दिन आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने कहा कि धर्म हमारा पुष्प है और दसलक्षण उसकी पंखुड़िया हैं, धर्म सागर है तो दसलक्षण उसकी लहरें। क्षमा धर्म पर बोलते हुए आचार्यश्री ने कहा कि हम क्रोध न करें, इसी का नाम क्षमा धर्म है। क्षमा मांगने की नहीं अपितु उसे अपने अंदर उतारने की जरूरत है। क्षमा वीरों का आभूषण है। उन्होंने आगे कहा कि रूप का आभूषण गुण है और गुण का आभूषण ज्ञान है और ज्ञान का आभूषण क्षमा है। ऐसे क्षमा धर्म को हमें अपने जीवन में उतारना और अंगीकार करना है।

जो विश्वव्यापी समस्याएं हैं, वे क्षमा धर्म के अपनाने से अपने आप दूर हो जाएंगी। पूरे विश्व की शांति के लिए क्षमा धर्म ही मूल मंत्र है। पर्युषण पर्व के दूसरे दिन बुधवार को दिगम्बर जिनालयों में मार्दव धर्म की आराधना की जाएगी। मुख्य आयोजन हबीबगंज जैन मंदिर में होगा। इसके अलावा अन्य मंदिरों में आध्यात्मिक संस्कार कक्षाएं भी लगाई जाएंगी। इनमें साधकों को संस्कारवान बनने का ज्ञान दिया जाएगा। इसी के साथ नेहरू नगर के जैन मंदिर में आर्यिका विभाश्री माता जी के सानिध्य में मूलनायक भगवान अजितनाथ का अभिषेक और शांतिधारा की गई।

माताजी ने कहा कि जिसने अपने जीवन में क्रोध को नष्ट कर दिया है और सहनशीलता को धारण कर लिया है, वह ही क्षमा धर्म को धारण करने योग्य होता है। प्रवक्ता अंशुल जैन ने बताया कि हबीबगंज जैन मंदिर में प्रात: 08.30 बजे से तत्वार्थ सूत्र वाचन तथा दोहपर में 03.00 बजे प्रवचन होंगे।


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