Virag Sagar Ji – विराग सागर जी महाराज का कुण्डलपुर (बिहार) में हुआ भव्य मंगल प्रवेश

virag sagar ji

Virag Sagar Ji – गुरुदेव राष्ट्रसंत गणाचार्य भगवन उपसर्ग विजेता 108 श्री विराग सागर जी महाराज विशाल ससंघ (85 पिच्छी) का भगवान महावीर स्वामी की जन्मभूमि कुण्डलपुर (बिहार) में हुआ भव्य मंगल प्रवेश।

★ बिहार स्टेट दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र कमिटी के उपाध्यक्ष अजय कुमार जी जैन एवं मानद मंत्री पराग जैन सपरिवार गणाचार्य श्री ससंघ की अगवानी करने पहुँचे श्री कुण्डलपुर जी तीर्थ क्षेत्र (बिहार)।
★ 17 वर्षो बाद बिहार राज्य में हुआ मंगल आगमन।

Virag Sagar Ji

 

जैन धर्म के अंतिम 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी की जन्मभूमि कुण्डलपुर, नालंदा की पावन धरा पर रविवार को प्रातः में गणाचार्य श्री Virag Sagar Ji महाराज ससंघ का गाजे-बाजे के साथ भव्य मंगल प्रवेश हुआ।
श्री कुण्डलपुर जी दिगम्बर जैन प्राचीन तीर्थ क्षेत्र में कमिटी के पदाधिकारीयों एवं श्रावकों ने गणाचार्य श्री का पाद प्रक्षाल कर मंगल आर्शीवाद प्राप्त किया।
गणाचार्य श्री महाराज ससंघ ने मुलवेदि भगवान महावीर स्वामी , गर्भ गृह , मानस्तम्भ, का दर्शन किया और भगवान महावीर की जीवन पर आधारित प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।
गणाचार्य श्री ससंघ की अगुवाई करने श्रावक बैंड-बाजे के साथ पंचरंगे झंडे लिए खड़े थे, जैसे ही विशाल ससंघ का आगमन कुण्डलपुर नगरी में हुआ श्रावकों के “जयकारा गुरुदेव का” ‘जय जय गुरुदेव’ के जयघोष से पुरा वातावरण गूंजामय हुआ
इतने बड़े जैन साधु-साध्वियो का जत्था जो भी लोग देख रहे है बस वो टक-टकी लगाए देखते ही रह जाते है।
गुरुदेव ससंघ का दर्शन, आर्शीवाद प्राप्त कर सभी श्रावक खुद को धन्य, पुण्यशाली और सौभाग्यशाली मानते है।
जहाँ से भी गुरुदेव Virag Sagar Ji ससंघ का मंगल विहार हो रहा वहाँ के जन का मन प्रफुल्लित हो रहा है।
मालूम हो कि इस विशाल संघ में सैंकड़ो की संख्या में श्रावक भी पद विहार कर रहे है।
इस यात्रा का प्रमुख संदेश अहिंसा, व्यसन मुक्ति, शाकाहार, बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ , स्वच्छ भारत अभियान है। जो दिल्ली से 17 जनवरी 2018 को प्रारंभ हुआ था , संघ हजारों किलोमीटर पैदल चलकर सात राज्यों से अनेक तीर्थो की यात्रा करते हुए भगवान महावीर स्वामी के नाम से प्रसिद्ध धरा बिहार राज्य पहुँचे हैं।
बता दें कि परम पूज्य गणाचार्य श्री 108 Virag Sagar Ji महाराज ससंघ का मंगल विहार शाश्वत तीर्थराज श्री सम्मेद शिखर जी के लिए चल रहा है जहाँ सैंकड़ो दिगम्बर जैन साधु-साध्वियों के साथ मंगल चातुर्मास होगा ।
आगे पावापुरी , गुणावां , झुमरी तिलैया होते श्री शिखर जी पहुँचेंगे।
पंचमकाल में इतनी कठिन चर्या, तपस्या,चाहे हो भीषण तपती गर्मी, कड़ाके की ठंड,में भी निरंतर नंगे पांव पैदल विहार, इतने बड़े संघ के संतो की कठिन साधना, तपस्या देख रोम रोम पुलकित हो जाता है, धन्य हैं ऐसे साधक जिन्होंने अनेक परीक्षाओं में विजयी प्राप्त कर अपने लक्ष्य तक पहुँचने का साहस किया।
जैन श्रद्धालु तो खुद को गौरवान्वित महसूस करते हैं कि हमें इतने कठिन चर्या अपनाने वाले वर्तमान के भगवन का सानिध्य मिलता है।

– प्रवीण जैन (पटना)

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