12 वर्ष का भव्य लेगा जैन दीक्षा, धूमधाम से निकाली फरारी से शोभा यात्रा


7वीं कक्षा में पढ़ने वाला भव्य शाह बचपन की शरारत, खेल-कूद और मस्ती भरी अठखेलियां को सदा के लिए छोड़ भिक्षु बनने की राह पर निकल पड़ा है। गुजरात के सूरत नगर के हीरा व्यापारी दीपेश शाह का बेटा भव्य शाह 12 अप्रैल को दीक्षा ग्रहण करने जा रहा है। इतनी कम उम्र में दीक्षा ग्रहण करने का ये फैसला लेना कोई साधारण घटना नहीं है बल्कि ये पारिवारिक और धार्मिक संस्कारों की गूढता का ही प्रतीक है कि 7वीं कक्षा का छात्र भव्य शाह सांसारिक सुख, भोग-विलास को त्याग दीक्षा लेने जा रहा है।

भव्य शाह ने अंतिम बार अपने परिवारीजनों से मुलाकात की और परिवारीजनों ने भी अपने लाडले पुत्र को जीभर देखा और प्यार किया। इसके बाद दीक्षा संस्कारों की कड़ी में शुभ महूर्त पर भव्यता के साथ फरारी यात्रा निकाली गई। गाड़ी को भव्य के पिता के दोस्त जयेश देसाई ने भेजा था, जिससे वह आखिरी बार अपनी इच्छा पूरी कर सके क्योंकि दीक्षा के बाद उसे पूरा जीवन पर्यन्त पैदल चलना पड़ेगा और सादा जीवन जीना पड़ेगा।

फरारी शोभायात्रा बहुत ही धूमधाम के साथ खुली जीप में निकाली गई। भव्य के पिता दीपेश का कहना है कि भव्य पिछले डेढ़ वर्ष से गुरुजी के पास ही रह रहा था और उसे अच्छी तरह पता है कि वह जिस रास्ते पर जा रहा है, उसमें पग-पग पर संघर्ष और कठिनाइयां हैं। जानकारी दे दें कि दीपेश के दो बेटे और एक बेटी है। चार वर्ष पूर्व भव्य की बड़ी बहन प्रियांशी ने भी दीक्षा ग्रहण की थी। अब उसी उम्र में भाई भव्य भी परिवार से निकल कर संत बनने जा रहा है।


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