100 साल बाद यरनाल की धरा हुई पावन जहाँ पधारे वात्सल्य के मूरत आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर


सनावद / यरनाल। प्रथमा चार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर जी की मुनि दीक्षा स्थली यरनाल में मुनि दीक्षा का शताब्दी  महोत्सवा मनाया जाना है

पावन मंगलकारी पवित्र भूमि पर आचार्य श्री की अक्षुण्ण बाल ब्रह्मचारी पट्ट परम्परा के परम्पराचार्य पंचम पट्टाधीश वात्सलय वारिधि 108 आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज ससंघ का 45 पिच्छी सहित भव्य मंगल प्रवेश यरनाल में दिनांक 11 जुलाई 2019 को दोपहर में हुआ। सन्मति जैन काका ने बताया की आचार्य संघ की आगवानी  जगत् गुरु श्री चारुकीर्ति जी स्वामी ( श्रवण बेलगोला )श्री जिनसेन स्वामी जी (नादणी)   श्री धर्मसेन स्वामी  जी (वरूर जैन मठ)  पद्म  विभूषण श्री वीरेंद्र जी हेगड़े  धर्मस्थल,   श्रावक श्रेष्ठी आदरणीय श्री अशोक जी पाटनी आर के मार्बल किशनगढ़ ,श्री आर के कटारिया अहमदाबाद ,  क्षेत्रीय विधायक श्री अभय जी पाटिल ,श्रीसंजय पाटिल ,श्री शशि कांत जी पूर्व मंत्री कर्नाटक शासन, श्री सरिता श्री महेंद्र जी चेन्नई ,श्री राव जी पाटिल श्री अनिल जी सेठी श्री श्रीपाल जी गंगवाल,  श्री संजय पापडी वाल , किशनगढ़ श्री पुष्पक जी बेलगाम आदि सम्पूर्ण भारत के विभिन्न राज्यो से आये गणमान्य श्रेष्ठियों ने आचार्य श्री शांति सागर जी फाउंडेशन यरनाल के पदाधिकारियों चातुर्मास कमेटी ने आगवानी की जलूस के प्रारम्भ में जैन समाज का बेंड ट्रेक्टर ट्राली पर आचार्य श्री शांति सागर जी की झांकी गजराज हाथी महिला संगीत दल सेकड़ो महिलाएं ड्रेस कोड में मंगल कलश मस्तक पर धारण कर चल रही थी रास्ते मे श्रद्धालुओ ने फूल बरसाए जगह जगह आचार्य श्री का चरण प्रक्षालन हुआ।

आचार्य संघ मंच पर विराजित हुए, कार्यक्रम का शुभारम्भ संगस्थ ब्रह्मचारिणी पूनम दीदी दीप्ति दीदी के मंगलाचरण से हुआ

आमंत्रित अतिथियों पदम विभूषित आदरणीय श्री वीरेंद्र जी हेगड़े  श्री अभय पाटिल श्रीसंजय पाटिल श्रीमती सरिता जी जैन आदि ने आचार्य श्री शांति सागर जी के चित्र का अनावरण कर दीप प्रवज्लन किया

स्वागत भाषण श्रीमती सरिता जी जैन ने दिया। आचार्य श्री शांति सागर जी एवम परम्परा के पूर्वाचार्यो को अतिथियों द्वारा अर्ध समर्पित किया गया। वात्सलय वारिधि आचार्य श्री समस्त मुनियों आर्यिकाओं श्री भट्टारक स्वामी जी को भी अर्ध अर्पित किया गया।

यरनाल समाज चातुर्मास कमेटी ने आचार्य श्री को वर्ष 2019 के चातुर्मास हेतु श्रीफल भेंट किया

विधायक श्री अभय पाटिल ने आचार्य श्री का शब्द सुमन से स्वागत कर बताया कि कर्नाटक सरकार की ओर से लगभग 25 करोड़ के निर्माण कार्य यरनाल मे चल रहे है। श्री संजय पाटिल ने कहा कि उत्तर भारत मे लक्ष्मी जी है इधर दक्षिण भारत मे सरस्वती जी है। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का आगमन अच्छे कर्मों का फल है।

बसंत आती है तो मौसम में बहार आती है। संत आते है तो समाज मे बहार आती है।

श्री वीरेंद्र जी हेगड़े  श्री अभय जी पाटिल श्री अशोक जी पाटनी आदि का स्वागत किया गया। आचार्य संध का आहार विहार में तन मन एवम धन से कर्मठता के साथ चौका लगाने वाले श्रावक श्राविकाओं का सम्मान किया गया।

श्री वीरेंद्र जी हेगड़े जी का उदबोधन हुआ। आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन आदरणीय हेगड़े जी श्री अशोक जी पाटनी श्री संजय पापड़ी वाल, श्री राजेन्द्र जी कटारिया श्रीमती सरिता जैन श्री राव सा पाटिल श्री पुष्पक जी  श्री श्रीपाल जी गंगवाल आदि अतिथियों एवम पदाधिकारियों ने किया। आचार्य श्री को शास्त्र भेंट श्रीमती सरिता जी ने किया।

नादणी के भट्टारक स्वामी जी श्री जिनसेन स्वामी जी ने कहा कि मैने श्री महावीर स्वामी जी  आचार्य श्री शांति सागर जी को नही देखा किन्तु मुझे वात्सलय वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी मे दोनों की झलक दिखती है।

श्री श्रवण बेलगोला के श्री चारुकीर्ति जी भट्टारक स्वामी जी  ने आचार्य श्री शांति सागर जी एवम आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी मे समानता बताई कि दोनों के हाथ मे ध्वज ओर चरणों मे चक्र है आपने बताया कि जब कि जब आचार्य श्री शांति सागर जी ने उत्तर भारत के श्री सम्मेद शिखर जी मे पंच कल्याणक कराया तब 125000 यात्रियों ने ट्रेन के टिकट लिए थे।

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के यरनाल आने से जंगल मे मंगल हो गया है। आपने कई पदाधिकारियो की तारीफ की, आपने कामना कि यरनाल में आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी शताब्दी वर्ष में 100 वी दीक्षा देवे, आतिथियों द्वारा आचार्य श्री शांति सागर जी के जीवन परिचय ग्रंथ के कन्नड़ मराठी गुजराती  ग्रंथ का विमोचन किया।

अतिथियों को आचार्य श्री द्वारा हस्ताक्षरित ग्रंथ स्मृति चिन्ह माला शाल श्रीफल से स्वागत किया गया। आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि आज का दिवस हमारे जीवन का मंगल दिवस है। हमने तथा संध ने प्रथम बार यरनाल की पवित्र भूमि का स्पर्श किया है हम रोमांचित है।

इसी पावन भूमि पर गुरुदेव ने पंच कल्याणक में मुनि दीक्षा लेकर मुनि धर्म का आगम अनुसार पालन कर लुप्त हो रहे धर्म को पुनः जाग्रत किया। हमने आचार्य श्री की जीवनी को पढ़ा 20 वी सदी में शास्त्र आगम अनुसार मुनि धर्म का पालन किया आचार्य श्री डरे नही झुके नही जिनवाणी के अनुरूप जो पढा जाता था उसी अनुरूप जीवन पथ पर चले।

आपने मात्र 35 वर्ष के साधु जीवन मे  88  दीक्षाये दी। यरनाल भाग्यशाली पुण्यशाली भूमि है। कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन श्री राकेश जी सेठी कोलकत्ता ने किया।

— सन्मति जैन काका


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