140 किमी लंबी जैन धर्म प्रभावना रथ यात्रा की जयपुर से हुई शुरूआत, 30 को श्री महावीर जी पहुंचेगी यात्रा।


राजस्थान के जयपुर नगर में पहली बार मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज एवं मुनि श्री विराट सागर जी महाराज के दिशा-निर्देशन में जैन समाज द्वारा जयपुर से श्री महावीरजी की लंबा 140 किलोमीटर मार्ग पर श्री महावीर वंदन धर्म प्रभावना यात्रा निकाल कर इतिहास में नाम दर्ज करा लिया है। यात्रा शुरू होने के पूर्व के मुनि श्री प्रमाण सागर जी एवं मुनि श्री विराट सागर जी  ने विशाल सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन का रथ तभी सही चलेगा, जब  भगवान के रथ को स्वयं अपने हाथों से खीचेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यह भगवान के समवशरण का विहार है। इसलिए इस रथ को किसी पशु द्वारा नहीं बल्कि श्रद्वापूर्वक भक्तों द्वारा खींचा जाएगा। यात्रा का संयोग ही है कि यात्रा में देव-शास्त्र-गुरू तीनों एक साथ यात्रा के साथ विहार कर रहे हैं। सुबह लगभग 11.00 बजे जयपुर के न्यूगेट स्थित रामलीला मैदान से शुरू हुई इस यात्रा की रवानगी के लिए पूरे देश के जैन समाज के लोग एकत्रित हुए। सुबह से ही जैसे-जैसे भक्तों की भीड़ बढ़ती गयी भगवान महावीर के जयकारों की गूंज वैसे-वैसे जयपुर के रामलीला मैदान से निकल कर दूर-दूर तक गुंजायमान होने लगी। भक्तों के उत्साह का यह आलम था कि धर्म प्रभावना यात्रा का पहला छोर घाटगेट पर था, वहीं अंतिम छोर रामलीला मैदान पर था। यात्रा मे साथ केसरिया रंग के परिधान से सुसज्जित महिलाएं और पुरुष जय-जयकार करते नजर आ रहे थे।

रथ में जैन धर्म के 24वें तीर्थकर भगवान महावीर की प्रतिमा के दर्शन करने और भक्तों द्वारा रथ को खींचने की होड़ लगी थी। राज्य के गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया ने इस जैन धर्म प्रभावना यात्रा रथ को रवाना किया। यात्रा रामलीला मैदान से अमआईरोड, सांगानेरी गेट, ट्रांसपोर्ट नगर, घाट की गूणी होते हुए राणाजी की नसियां जी पहुंची। वहां मुनि श्री के पद पक्षालन कर आरती की गई। यहां से दोपहर 03.00 बजे यात्रा पुन: होकर कानोता के आदर्श उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पहुंची। समिति के मुख्य समन्वयक राजेंद्र के. गोधा एवं अध्यक्ष गणोश कुमार राणा ने बताया कि कानोता से यात्रा बस्सी चक होते हुए झर पहुंचेगी। इसके बाद दौसा, कालाखोह, सकिंदरा, गीजगढ़, तालचिडा, नदौती और खेड़ला-खेड़ली होते हुए दिनांक 30 दिसम्बर को श्री महावीर जी पहुंचेगी, जहां यात्रा का नगर भ्रमण होकर धर्मसभा के साथ यात्रा का समापन होगा। 31 दिसम्बर को श्री महावीरजी में कोटि जाप्यानुष्ठान एवं नववर्ष के प्रथम दिन 01 जनवरी को श्री वर्धमान विधान मंडल पूजा का आयोजन किया जाएगा।


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