मुनि पुगंव सुधासागर ससंघ की जय जयकार से गूंजा बांसवाडा नगर


राजस्थान के बांसवाडा में शुक्रवार का दिन जैन समुदाय के लिए हषरेउल्लास से परिपूर्ण रहा। प्रात: 08.30 बजे आचार्य विद्यासागर जी के शिष्य मुनि पुगंव सुधासागर जी का ससंघ जैसे ही कॉलेज रोड से नगर में प्रवेश हुआ तो जैन समुदाय एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आचार्य श्री एवं ससंघ की पूरे उल्लास और भावपूर्ण आगवानी की। आचार्यश्री के संघ को शोभायात्रा के रूप में खांदू कालोनी स्थित जैन मंदिर लाया गया। विशाल शोभायात्रा में 5 हाथी, 11 घोड़े, 5 बग्गी, 8 बैंड-बाजे के शोभायात्रा की शोभा को और चांद लगा रहे थे। यात्रा में महिलाएं मंगल कलश लिये नृत्य कर रही थी। इसी तरह पुरुष युवा भी लाला साफा बांधे आचार्य श्री की जय जयकार कर रहे थे। नगर के विभिन्न स्थानों पर आचार्यश्री का पाद पक्षालन किया गया। सभी संतों के सत्कार में पूरी खांदू कालोनी को सजाया गया था। जगह-जगह स्वागत द्वार, मंदिर जी में भव्य रोशनी से सजावट की गयी थी। विशाल शोभायात्रा प्रात: लगभग 10.30 बजे श्रेयांसनाथ जिनालय पहुंची। इसके बाद आचार्यश्री ने संत भवन निर्माण का लोकार्पण किया। समाज के शरद जैन ने कहा कि लोकर्पण की बोली श्रीपाल मेंगावत, महेंद्र मेंगावत, बादामीलाल मेंगावत, विजयचंद्र पंचारी, अभय कोठारी, शरद जगिसोत, अशोक घुघरावत, शिशुपाल जैन, धनपाल पंचोली ने ली। इसके बाद एक विशाल सभा को संबोधित करते हुए आचार्यश्री ने कहा कि हमेशा कोई भी कार्य करो, तब जोश में साथ होश में रहना जरूरी है। संत मन एवं वचन से धर्म साधना करते हैं और श्रावक तन, मन से साधना करते हैं साथ ही धन का धर्म में  उपयोग भी करते रहते हैं। आचायश्री ने कहा श्रेयांसनाथ जी की कृपा से खांदू कालोनी में सम्पन्नता और खुशी प्रभाहित है साथ ही मेरा आशीर्वाद भी सदैव बांसवाड़ा के लोगों के साथ है। इसलिए हमेशा खांदू कालोनी का विकास होता रहेगा। आचार्यश्री ने श्रेयांसनाथ जी की प्रतिमा का नित्य अभिषेक करने की नसीहत दी। उन्होंने यह भी कहा कि वास्तविक हंसी और बनावटी हंसी में अंतर है। हमेशा ओल्ड इज गोल्ड की थ्योरी समझो। इसलिए पुराने लोगों की कद्र करते रहते रहना चाहिए। आचार्यश्री के प्रवास के दौरान नित्य-प्रतिदिन कार्यक्रम इस प्रकार हैं। प्रात: 06.30 गुरूभक्ति, 07.00 अभिषेक एवं शांतिधारा, 08.00 सामूहिक पूजन, 08.30 मंगल प्रवचन, 10.00 आहारचर्या, दोपहर में स्वाध्याय, सायं 06.00 गुरू भक्ति, 07.00 आरती।


Comments

comments