सीमा पर जैन संतों ने दिया अहिंसा का संदेश, पाकिस्तानियों ने भी सुना


भगवान महावीर के बताये रास्ते पर चलकर अहिंसा परमो धर्म एवं शांति का संदेश पूरे देश भर में  पैदल चलकर जन-जन तक पहुंचाने वाले आचार्य श्रीमंद विजय जयानंद जी महाराज ने फजिल्का की भारत-पाक सीमा पर पहुंचकर अहिंसामयी संदेश दिया, जिसे दोनों देशों के लोगों ने पूरी भावना के साथ सुना। इस मौके पर जैन संत मुनिराज जयकीर्ति विजय एवं दिवांशु विजय के अलावा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का सीमा सुरक्षा बल के अधिकारियों, जवानों, शहीद भगवत सिंह यूथ क्लब पक्का चिश्ती, बार्डर एरिया विकास फ्रंट एवं बार्डर एरिया संघर्ष कमेटी के पदाधिकारियों ने मुनियों का स्वाग किया।

जैन संतों ने मंत्रोच्चारण कर वहां बने सर्वधर्म मंदिर में भगवान महावीर की मूर्ति का अनावरण किया। इसके बाद सायं दोनों देशों के बीच होने वाली रीट्रीट सैरेमनी को देखने के बाद सीमा पर ही खड़े दोनों देशों के हजारों लोगों को संबोधित किया। संत जयानंद विजय जी ने कहा कि दुनिया को कोई भी हिंसा का पाठ नहीं पढ़ाता। अहिंसा ही परम धर्म है। उन्होंने भगवान महावीर एवं श्रीराम भक्त हनुमान के बताए रास्ते पर चलके का पण्रलिया। स्वामी ने सीमा सुरक्षा बल द्वारा देश के लिए दी जा रही सेवाओं की प्रशंसा करते हुए उनके बनोबल के लिए मंगलपाठ किया। संत जयकीर्ति विजय जी ने कहा कि संत और सैनिक दोनों ही देश में शांति कायम करने के लिए आगे रहते हैं।

सैनिक सीमा पर प्रहरी बनकर देश में अमन-शांति के लिए देश की रक्षा करते हैं तो संत देश के भीतर घूम-घूमकर शांति और अहिंसा का संदेश देकर देश की रक्षा करते हैं। इस मौके पर संतों के प्रवचन पाकिस्तानी सीमा में खड़े पाकिस्तानी नागरिक भी सुन रहे थे और कइयों ने तो पाकिस्तानी सीमा से ही संतों को नमन किया। इस मौके पर एडवोकेट अनिल जैन, पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष महिन्द्र प्रताप धींगड़ा, बार्डर एरिया विकास फ्रंट के अध्यक्ष एलडी शर्मा, प्रिसिंपल संगीता तिन्ना, मंगन चंद जैन, सुरजीत जैन, हीरालाल जैन, नरेश सपड़ा, रमेश भूसरी, शहीद भगवत  सिंह यूथ क्लब के सचिव जसप्रीत सिंह, रसालासिंह एवं अन्य वरिष्ठगण मौजूद थे।

 


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